NATO शिखर सम्मेलन से पहले बढ़ा ट्रांसअटलांटिक तनाव: रक्षा गारंटी पर अमेरिका-यूरोप में मतभेद

Diya Gupta
2 हफ्ते पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Monika Das
2 हफ्ते पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Ravi sinha
2 हफ्ते पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
NATO शिखर सम्मेलन से पहले बढ़ी कूटनीतिक हलचल
इस सप्ताह होने जा रहे NATO शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिका और यूरोपीय सहयोगी देशों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। ईरान संकट और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच सदस्य देशों में सामूहिक सुरक्षा और भविष्य की रणनीति को लेकर व्यापक चर्चा तेज हो गई है। सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
ट्रंप के बयानों से यूरोपीय देशों की बढ़ी चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO को कई बार "एकतरफा व्यवस्था" बताते हुए यूरोप में अमेरिकी सैन्य बलों की संख्या कम करने की बात कही है। उनके इन बयानों के बाद कई यूरोपीय देशों को आशंका है कि अमेरिका भविष्य में NATO की सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धता (Article 5) को लेकर अपना रुख बदल सकता है। इससे ट्रांसअटलांटिक संबंधों में तनाव बढ़ा है।
ईरान संघर्ष ने बढ़ाई सुरक्षा चुनौतियां
अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव ने पश्चिमी देशों की सुरक्षा रणनीति पर भी असर डाला है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका के Patriot मिसाइल भंडार पर दबाव बढ़ा है। वहीं NATO ने इस संघर्ष में प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखी है, जिस पर ट्रंप ने कुछ यूरोपीय सहयोगियों की आलोचना करते हुए उन्हें पर्याप्त सहयोग न देने का आरोप लगाया।
रूस-यूक्रेन युद्ध बना सम्मेलन का बड़ा मुद्दा
शिखर सम्मेलन से पहले रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव सहित कई इलाकों पर बड़े हमले किए हैं। लगातार जारी संघर्ष के कारण NATO देशों की सुरक्षा, हथियारों की आपूर्ति और यूक्रेन को मिलने वाले समर्थन पर भी विशेष चर्चा होने की संभावना है। यह मुद्दा सम्मेलन के प्रमुख एजेंडों में शामिल माना जा रहा है।
ट्रंप ने पुतिन और जेलेंस्की से की बातचीत
सम्मेलन से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से अलग-अलग फोन पर बातचीत की। ट्रंप ने दावा किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान की संभावना पहले की तुलना में अधिक करीब है, हालांकि इस संबंध में किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं की गई है।
वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर टिकी दुनिया की नजर
NATO शिखर सम्मेलन से यह तय होने की उम्मीद है कि सदस्य देश सामूहिक रक्षा, रक्षा खर्च, यूक्रेन को समर्थन और मध्य-पूर्व की बदलती सुरक्षा चुनौतियों पर आगे किस दिशा में बढ़ेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सम्मेलन के फैसले आने वाले समय में यूरोप और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।







