India economy resilient: अर्थव्यवस्था मजबूत, जोखिमों पर नजर

Monika Das
3 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Kavya Mishra
3 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Arjun Singh
4 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Krishna Yadav
6 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Sonu rai
6 घंटे पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Riya Jain
7 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Trapti Tanwar
7 घंटे पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Myra Dubey
8 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Aarav Sharma
8 घंटे पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Anjali Patil
10 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Myra Dubey
11 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की हालिया Monthly Economic Review में वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को मजबूत बताया गया है। समीक्षा के अनुसार घरेलू मांग आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रही है और विनिर्माण क्षेत्र में भी विस्तार के संकेत बने हुए हैं। हालांकि वैश्विक आर्थिक माहौल में मौजूद अनिश्चितताओं के कारण आने वाले समय में बाहरी जोखिमों पर नजर बनाए रखना जरूरी है। मंत्रालय का आकलन है कि घरेलू आर्थिक आधार फिलहाल मजबूती प्रदान कर रहा है। ऐसे में भारत के लिए घरेलू मांग और उत्पादन गतिविधियों की गति बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी बाहरी चुनौती
वित्त मंत्रालय ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को भारत के लिए महत्वपूर्ण बाहरी जोखिमों में शामिल किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहने पर भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे चालू खाते और व्यापक आर्थिक संतुलन पर असर पड़ने की संभावना रहती है। जुलाई की आर्थिक समीक्षा में भी मंत्रालय ने लंबे समय तक ऊंची कच्चे तेल कीमतों से राजकोषीय और चालू खाते से जुड़े दबाव की आशंका जताई थी। इसलिए ऊर्जा कीमतों की दिशा पर लगातार नजर रखना आर्थिक नीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया तनाव से आपूर्ति व्यवस्था पर जोखिम
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिश्चितता का प्रमुख कारण बना हुआ है। क्षेत्र में किसी भी बड़े घटनाक्रम का असर ऊर्जा बाजार, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ सकता है। भारत के लिए यह जोखिम खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक ऊर्जा कीमतों और व्यापारिक मार्गों में बदलाव का घरेलू अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। वित्त मंत्रालय ने वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव और उनसे पैदा होने वाले बाहरी दबावों पर सतर्क रहने की जरूरत बताई है। हालांकि फिलहाल घरेलू आर्थिक गतिविधियों को मजबूत आधार मिल रहा है।
El Nino से कृषि और महंगाई का जोखिम
अगस्त की आर्थिक समीक्षा में El Nino की संभावित स्थिति को भी महत्वपूर्ण जोखिम के रूप में रेखांकित किया गया है। मौसम में बदलाव का असर कृषि उत्पादन और आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से खरीफ फसलों के महत्वपूर्ण चरणों में मौसम की स्थिति पर निगरानी जरूरी होगी। यदि कृषि उत्पादन प्रभावित होता है तो खाद्य महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए मंत्रालय ने मौसम संबंधी परिस्थितियों और खाद्य कीमतों के रुझान को आर्थिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण माना है।
महंगाई पर खाद्य कीमतों का असर
वित्त मंत्रालय की समीक्षा में महंगाई के रुझान और उसमें खाद्य कीमतों की भूमिका पर भी ध्यान दिया गया है। जुलाई में खुदरा महंगाई में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि खाद्य कीमतों में बदलाव इसका एक महत्वपूर्ण कारण रहा। मंत्रालय के आकलन के अनुसार खाद्य महंगाई में लगातार बढ़ोतरी होने पर घरेलू उपभोग और वास्तविक आय पर असर पड़ सकता है। ऐसे में खाद्य वस्तुओं की कीमतों, मौसम और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है। महंगाई को नियंत्रित रखना घरेलू मांग और आर्थिक विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
विकास के साथ बाहरी जोखिमों की निगरानी जरूरी
वित्त मंत्रालय का मौजूदा आकलन यह संकेत देता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों से समर्थन मिल रहा है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को लेकर सावधानी जरूरी है। कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक ब्याज दरों की दिशा और El Nino जैसी परिस्थितियां आने वाले समय में भारत के आर्थिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं। मंत्रालय ने इन जोखिमों की निगरानी और नीतिगत सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया है। इसलिए मौजूदा स्थिति को मजबूत घरेलू आधार और बाहरी अनिश्चितताओं के बीच संतुलन वाली स्थिति के रूप में देखा जा सकता है।








