RBI के सामने महंगाई बनाम ग्रोथ की चुनौती: SBI रिपोर्ट: रेपो रेट में बदलाव के आसार कम

Ravi sinha
0 सेकंड पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेYeh mudda rajneeti se upar hai, insaniyat ki baat hai.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेAam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.
Nisha Shah
0 सेकंड पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेJab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Simran Arora
0 सेकंड पहलेHum is cause ke saath hain!
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक से पहले एसबीआई रिसर्च की नई इकोव्रैप (Ecowrap) रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की मजबूत आर्थिक विकास दर को बनाए रखते हुए लगातार बनी हुई महंगाई पर नियंत्रण रखना होगी। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में आरबीआई बेहद संतुलित और सतर्क रुख अपनाएगा।
इस बार भी रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम
एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 5.50 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता और रुपये पर दबाव को देखते हुए ब्याज दरों में कटौती फिलहाल जोखिम भरा कदम हो सकता है। इसलिए केंद्रीय बैंक इस बैठक में यथास्थिति बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकता है।
पहली तिमाही में GDP करीब 7 प्रतिशत रहने का अनुमान
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। यात्री वाहनों की बिक्री में 24.1 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी और बिजली की मांग में 11.5 प्रतिशत का उछाल आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत दे रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास गति अभी भी मजबूत बनी हुई है।
महंगाई बनी रहेगी सबसे बड़ी चिंता
आर्थिक विकास के सकारात्मक संकेतों के बावजूद खुदरा महंगाई (CPI) अभी भी आरबीआई के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाली दो तिमाहियों तक महंगाई 5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है, जबकि पूरे वित्त वर्ष में इसका औसत भी लगभग 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ऐसे में महंगाई पर नियंत्रण केंद्रीय बैंक की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।
वैश्विक संकट और रुपये पर दबाव भी अहम वजह
एसबीआई रिसर्च का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और विदेशी पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। इन परिस्थितियों में ब्याज दरों में जल्द कटौती करने से रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए आरबीआई फिलहाल सतर्क नीति अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
विकास और स्थिरता दोनों पर रहेगा आरबीआई का फोकस
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले महीनों में आरबीआई की रणनीति आर्थिक विकास को समर्थन देने के साथ-साथ महंगाई को नियंत्रित रखने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और घरेलू महंगाई में सुधार होता है, तभी भविष्य में ब्याज दरों में कटौती पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल केंद्रीय बैंक के लिए संतुलित मौद्रिक नीति ही सबसे उपयुक्त विकल्प मानी जा रही है।








