Balaghat Child Deaths Controversy: अभिजीत दिपके के व्यंग्यात्मक इस्तीफे पर विवाद

Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Anjali Patil
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। विभिन्न रिपोर्टों और जनहित याचिका में इन मौतों को संक्रामक बीमारियों, कुपोषण और कमजोर स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़कर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि मौतों की अंतिम और आधिकारिक वजह को केवल दूषित पानी मानना अभी सही नहीं होगा, क्योंकि पूरे मामले की जांच और तथ्यात्मक पड़ताल जारी है। प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने और अस्पतालों में भर्ती किए जाने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार चार गांवों के स्वास्थ्य सर्वे के बाद 486 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए, जिनमें से 446 स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं और करीब 40 का इलाज जारी बताया गया है।
अभिजीत दिपके ने उठाए पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बालाघाट के प्रभावित आदिवासी गांवों अदोरी, कोरका और बोन्दारी का दौरा किया और मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं, स्कूल की स्थिति और पेयजल व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर वहां से वीडियो और तस्वीरें साझा कीं। एक वीडियो में नल से निकलते मटमैले पानी को दिखाते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या मंत्री और विधायक अपने बच्चों को ऐसा पानी पिलाएंगे। रिपोर्टों के अनुसार दिपके ने आदिवासी क्षेत्रों में स्कूलों की स्थिति और ASHA कार्यकर्ताओं के कथित बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया। इन दावों को उनके दौरे और बयानों के रूप में देखा जाना चाहिए, जबकि पानी की गुणवत्ता और मौतों के बीच सीधा कारणात्मक संबंध अभी आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है।
व्यंग्यात्मक इस्तीफे से बढ़ा विवाद
बालाघाट दौरे के दौरान दिपके को कुछ स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स के विरोध का सामना करना पड़ा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ लोगों ने उन पर इस त्रासदी के बीच राजनीति करने का आरोप लगाया। इसके बाद दिपके ने सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम और पद का इस्तेमाल करते हुए एक व्यंग्यात्मक इस्तीफा पत्र पोस्ट किया। पत्र में उन्होंने काल्पनिक मुख्यमंत्री के तौर पर बच्चों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं और साफ पानी उपलब्ध नहीं करा पाने की जिम्मेदारी लेने का तंज किया। रिपोर्टों में इसे स्पष्ट रूप से satirical या sarcastic resignation बताया गया है, यानी यह वास्तविक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं था। इसी पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर लेटरहेड के इस्तेमाल को लेकर भी विवाद सामने आया।
कांग्रेस ने सरकार से जवाबदेही की मांग की
बालाघाट मामले को लेकर कांग्रेस ने भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 15 सितंबर को बालाघाट में न्याय यात्रा निकाली और प्रभावित परिवारों से मुलाकात करते हुए सरकार से जवाबदेही और कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस ने आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल, पोषण और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, इन राजनीतिक आरोपों को स्वतंत्र रूप से सरकार की अंतिम जिम्मेदारी या मौतों के कारण का प्रमाण नहीं माना जा सकता, क्योंकि मामले पर न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर जवाब मांगा गया है तथा स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई भी जारी है।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
बालाघाट में बच्चों की मौतों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट कलेक्टर समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में बच्चों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने, कुपोषण और प्रभावित क्षेत्रों में पीने के पानी की स्थिति को लेकर आरोप लगाए गए थे। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर नहीं बल्कि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था, जिसके बाद निरीक्षण संबंधी जानकारी अदालत के सामने रखी गई। रिपोर्टों के अनुसार अगली सुनवाई 18 सितंबर को है। इस स्तर पर अदालत ने मौतों के कारण या किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।





