Bhopal Master Plan Deadline: भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर आपत्तियों की तारीख बढ़ाने की मांग

भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर आपत्तियों की तारीख बढ़ाने की मांग
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मास्टर प्लान पर आपत्ति दर्ज कराने की समय-सीमा बढ़ाने की मांग
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के प्रारूप पर आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने की अंतिम तारीख 27 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की मांग उठी है। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि लगातार अवकाश के कारण नागरिकों को योजना का अध्ययन करने और अपनी राय प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। समिति का कहना है कि प्रस्तावित विकास योजना भोपाल के भविष्य और नागरिक सुविधाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए लोगों को इस पर अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

 

25 सितंबर को राजपत्र में प्रकाशित हुआ था प्रारूप
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के अनुसार, भोपाल विकास योजना 2047 का प्रारूप 25 सितंबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। समिति ने मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 18(1) का हवाला देते हुए बताया कि प्रकाशन के दिन को छोड़कर 30 दिनों की अवधि की गणना करने पर आपत्ति और सुझाव प्रस्तुत करने की अंतिम तारीख 25 अक्टूबर 2026 बनती है। समिति का मानना है कि तय समय-सीमा के दौरान पड़ने वाले अवकाश को ध्यान में रखते हुए नागरिकों को अतिरिक्त समय देना उचित होगा।

 

24 से 26 अक्टूबर तक अवकाश का हवाला
समिति ने मध्यप्रदेश सामान्य खंड अधिनियम, 1957 की धारा 7 का उल्लेख करते हुए कहा है कि यदि निर्धारित अंतिम दिन संबंधित कार्यालय बंद रहता है, तो अगले कार्यदिवस में कार्यवाही किए जाने का प्रावधान लागू हो सकता है। समिति के मुताबिक, 24 से 26 अक्टूबर तक कार्यालय बंद रहने की स्थिति को देखते हुए आपत्तियां और सुझाव जमा कराने की अंतिम तारीख 27 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाई जानी चाहिए। हालांकि, समय-सीमा बढ़ाने को लेकर प्रशासन की आधिकारिक घोषणा और लागू नियमों की पुष्टि जरूरी है।

 

नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के संयोजक एवं याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने प्रशासन से मांग की है कि भोपाल के नागरिकों को मास्टर प्लान के प्रारूप का अध्ययन करने और आपत्तियां व सुझाव प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। उनका कहना है कि शहर के भविष्य के विकास, भूमि उपयोग और नागरिक सुविधाओं से जुड़े फैसलों में आम लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। समिति ने आग्रह किया है कि अवकाश और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए समय-सीमा बढ़ाने पर जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग प्रस्तावित योजना पर अपनी राय दे सकें।

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