OBC कॉलम पर कांग्रेस का हमला: जाति जनगणना के प्रारूप पर कांग्रेस के सवाल

Sonu rai
0 सेकंड पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
केंद्र सरकार की ओर से 2027 की डिजिटल जनगणना के लिए प्रश्नावली जारी किए जाने के बाद कांग्रेस ने इसके प्रारूप पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि जातियों की पहचान के लिए डिजिटल प्रक्रिया में कोई ड्रॉपडाउन मेनू या पूर्व निर्धारित सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। पार्टी के अनुसार, लोगों को अपनी जाति खुद लिखकर बतानी होगी, जिससे एक ही जाति के अलग-अलग नाम और वर्तनी दर्ज हो सकती हैं। कांग्रेस का दावा है कि इससे तैयार होने वाला जातिगत डेटा काफी जटिल और अव्यवस्थित हो सकता है। पार्टी ने सरकार से जातियों की पहचान के लिए स्पष्ट और वैज्ञानिक व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
OBC कॉलम को लेकर कांग्रेस का बड़ा आरोप
कांग्रेस के ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने 14 अगस्त को जारी प्रश्नावली के 10वें सवाल को लेकर आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC के लिए अलग से कोई स्पष्ट कॉलम नहीं रखा गया है। कांग्रेस का कहना है कि इससे देश की बड़ी आबादी से संबंधित जातिगत आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में परेशानी हो सकती है। पार्टी ने इसे ओबीसी समुदाय के साथ अन्याय बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि सही जातिगत आंकड़े सामाजिक और आर्थिक नीतियां बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। पार्टी ने सरकार से प्रश्नावली में जरूरी बदलाव करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के हलफनामे का हवाला
कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दाखिल किए गए हलफनामे का भी हवाला दिया है। पार्टी का दावा है कि उस समय सरकार ने सटीक जातिगत आंकड़े जुटाने के लिए ड्रॉपडाउन मेनू को बेहतर विकल्प बताया था। कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार पहले इस व्यवस्था को उपयोगी मानती थी तो अब डिजिटल जनगणना में इसे लागू क्यों नहीं किया गया। विपक्ष ने इसे सरकार के पुराने रुख और मौजूदा व्यवस्था के बीच विरोधाभास बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जातिगत आंकड़ों में गलतियां रोकने के लिए पहले से निर्धारित विकल्प अधिक प्रभावी हो सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को किया खारिज ,
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा और केंद्र सरकार की ओर से पलटवार किया गया है। सरकार का कहना है कि 2027 की जनगणना में जातिगत गणना को लेकर किसी तरह की अनदेखी नहीं की जा रही है और विपक्ष द्वारा भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। सरकार से जुड़े तर्क के अनुसार, देश में जातियों और उपजातियों के नामों में इतनी विविधता है कि सभी को एक ड्रॉपडाउन सूची में शामिल करना बेहद मुश्किल होगा। इसी वजह से लोगों को अपनी जाति बताने के लिए ओपन कॉलम की व्यवस्था रखी गई है। भाजपा का कहना है कि इससे लोगों को अपनी स्थानीय और सही जाति का नाम दर्ज कराने की सुविधा मिलेगी। सरकार ने जाति गणना को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरा करने की बात कही है।
SECC 2011 को लेकर भाजपा का पलटवार
भाजपा ने कांग्रेस के मौजूदा आरोपों के जवाब में 2011 की सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना यानी SECC का मुद्दा भी उठाया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय भी जातियों के नाम दर्ज करने के लिए खुला विकल्प रखा गया था। भाजपा के अनुसार, उस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में अलग-अलग जाति, उपजाति और स्थानीय नाम सामने आए थे, जिससे डेटा को व्यवस्थित करने में काफी कठिनाई हुई। भाजपा ने कांग्रेस से सवाल किया है कि यदि ओपन-एंडेड व्यवस्था इतनी खराब थी तो तत्कालीन सरकार ने उस समय इसे क्यों अपनाया। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि कांग्रेस अब राजनीतिक कारणों से उसी तरह की व्यवस्था पर सवाल उठा रही है। इस मुद्दे ने जाति जनगणना को लेकर दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और बढ़ा दिए हैं।
जाति जनगणना पर आगे बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद
कांग्रेस ने सरकार से जातियों की पहचान के लिए स्पष्ट व्यवस्था और OBC से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने की मांग की है। पार्टी ने संकेत दिया है कि यदि उसकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वह इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाएगी। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि जनगणना एक व्यापक राष्ट्रीय प्रक्रिया है और इसमें तकनीकी तथा डेटा सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है। सरकार का तर्क है कि माता-पिता की जानकारी और जन्म स्थान जैसे सवाल डेटा की सटीकता तथा दोहराव रोकने के लिए रखे गए हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर जनगणना जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है। ऐसे में 2027 की जाति जनगणना का प्रारूप आने वाले दिनों में भी देश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।







