Jamia Student Protest Split: जामिया में छात्र आंदोलन दो गुटों में बंटा

Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Yash Kulkarni
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
जामिया में छात्र आंदोलन दो गुटों में बंटा
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार, 26 अक्टूबर को छात्रों की तीन प्रमुख मांगें स्वीकार कर लीं। प्रशासन के आदेश के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच प्रदर्शन खत्म करने को लेकर सहमति नहीं बन पाई। एक गुट ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी है, जबकि दूसरा गुट चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग पर अब भी आंदोलन जारी रखे हुए है।
प्रशासन ने तीन प्रमुख मांगें मानीं
प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग थी कि छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएं, प्रदर्शन के दौरान जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लिए जाएं तथा सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जांच के लिए एक कमेटी गठित की जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने आदेश में इन मांगों को स्वीकार किया है। इसके तहत संबंधित नोटिस वापस लेने और सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जांच के लिए कमेटी बनाने की बात कही गई है।
चुनाव की तारीख घोषित करने पर अड़ा दूसरा गुट
प्रशासन के आदेश के बावजूद भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के एक गुट ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया है। छात्रों का कहना है कि आदेश में छात्रसंघ चुनाव की निश्चित तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है। प्रशासन ने संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने की बात कही है, लेकिन प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि चुनाव की तारीख स्पष्ट रूप से घोषित की जाए। इसी मांग को लेकर दूसरा गुट अब भी प्रदर्शन कर रहा है।
एक गुट ने खत्म की भूख हड़ताल
जामिया में फिलहाल आंदोलन को लेकर छात्रों के बीच मतभेद की स्थिति बनी हुई है। एक गुट ने प्रशासन की ओर से मांगें स्वीकार किए जाने के बाद भूख हड़ताल समाप्त कर दी है, जबकि दूसरा गुट चुनाव की तारीख घोषित होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़ा है। छात्रों ने अपने मांगपत्र में प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ दिए गए कथित मानहानिकारक बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सार्वजनिक माफी मांगने तथा संबंधित पोस्ट हटाने का आश्वासन भी दिया था। अब विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।








