India Life Expectancy: भारतीयों की उम्र पाकिस्तान से ज्यादा

Kabir Shukla
2 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Aarav Sharma
5 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Nisha Shah
6 घंटे पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Vaishali shinde
6 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Payal jadon
8 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Dhruv Bhatt
8 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Krishna Yadav
10 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Kabir Shukla
11 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
भारत में औसत उम्र 71 साल
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के ताजा अनुमान के मुताबिक 2023 में भारत में जन्म के समय औसत जीवन प्रत्याशा 71 साल थी। यह पाकिस्तान की 68.2 साल की औसत जीवन प्रत्याशा से अधिक है, लेकिन बांग्लादेश की 72.7 साल, अमेरिका की 78.5 साल और कनाडा की 81.4 साल की तुलना में कम है। आंकड़े WHO के ग्लोबल हेल्थ एस्टीमेट्स का हिस्सा हैं, जिसमें 2000 से 2023 तक जीवन प्रत्याशा, स्वस्थ जीवन अवधि, मौत के कारण और बीमारी के बोझ से जुड़े आंकड़े शामिल हैं।
स्वस्थ जीवन की अवधि 60.6 साल
रिपोर्ट के अनुसार 2023 में भारत में स्वस्थ जीवन की औसत अवधि 60.6 साल रही। 2019 में यह 60.5 साल थी, जबकि 2021 में महामारी के दौरान घटकर 58.4 साल हो गई थी। इसके बाद 2022 में इसमें सुधार हुआ और यह 60.2 साल तक पहुंची। WHO के अनुसार वैश्विक औसत जीवन प्रत्याशा महामारी से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई है, लेकिन स्वस्थ जीवन की अवधि में सुधार अपेक्षाकृत धीमी गति से हुआ है।
60 साल की उम्र के बाद भी बढ़ी उम्मीद
भारत में अधिक उम्र के लोगों की जीवन प्रत्याशा में भी मामूली सुधार दर्ज किया गया। 2019 में 60 साल की उम्र वाले व्यक्ति के लिए आगे औसतन 18.4 साल जीने की उम्मीद थी, जो 2023 में बढ़कर 18.8 साल हो गई। इनमें पूरी तरह स्वस्थ रहने की अनुमानित अवधि भी 2019 के 13.4 साल से बढ़कर 2023 में 13.7 साल हो गई।
भारत में बीमारियों का स्वरूप बदला
WHO के अनुमानों के अनुसार भारत में पिछले दो दशकों में मौतों से जुड़ी बीमारियों का स्वरूप काफी बदला है। वर्ष 2000 में मौत की 10 प्रमुख वजहों से होने वाली कुल मौतों में संक्रामक बीमारियों का हिस्सा करीब 62 प्रतिशत था, जबकि गैर-संचारी बीमारियों यानी NCDs का हिस्सा करीब 34 प्रतिशत था। 2023 तक स्थिति बदल गई और प्रमुख कारणों से होने वाली मौतों में NCDs की हिस्सेदारी करीब 75 प्रतिशत, जबकि संक्रामक बीमारियों की हिस्सेदारी करीब 16 प्रतिशत रह गई।
पाकिस्तान और बांग्लादेश से तुलना
2023 के आंकड़ों में भारत की 71 साल की जीवन प्रत्याशा पाकिस्तान की 68.2 साल से अधिक रही। वहीं बांग्लादेश में यह 72.7 साल थी, यानी भारत से 1.7 साल अधिक। इस तुलना से पता चलता है कि पड़ोसी देशों में जीवन प्रत्याशा का स्तर अलग-अलग है और केवल औसत उम्र के आंकड़े से किसी देश की स्वास्थ्य स्थिति का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता।
लंबी उम्र का मतलब हमेशा स्वस्थ जीवन नहीं
WHO के आंकड़े यह भी बताते हैं कि जीवन प्रत्याशा और स्वस्थ जीवन की अवधि अलग-अलग संकेतक हैं। कोई व्यक्ति अधिक वर्षों तक जीवित रह सकता है, लेकिन उन वर्षों का एक हिस्सा बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ भी गुजर सकता है। इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्था और लोगों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए जीवन प्रत्याशा के साथ स्वस्थ जीवन की अवधि और बीमारी के बोझ जैसे आंकड़ों को भी देखना जरूरी है।








