Urea Subsidy Explained: यूरिया की हर बोरी पर ₹2700 सब्सिडी दे रही सरकार

Payal jadon
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Anika Rajput
54 मिनट पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Ravi sinha
1 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Taushif Shekh
2 घंटे पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
यूरिया की हर बोरी पर ₹2700 सब्सिडी का दावा
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद केंद्र सरकार किसानों को सस्ती दर पर खाद उपलब्ध कराने के लिए बड़ी सब्सिडी दे रही है। उनके अनुसार, एक बोरी यूरिया पर सरकार की ओर से करीब 2,700 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी और पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान आयात लागत बढ़ने के बावजूद सरकार ने इसका पूरा बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया।
वैश्विक कीमत बढ़ी, किसानों को सस्ती खाद
वित्त मंत्री के मुताबिक, कुछ परिस्थितियों में यूरिया की आयात लागत करीब 3,000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई थी, लेकिन किसानों को सस्ती दर पर यूरिया उपलब्ध कराया गया। सरकार यूरिया की वास्तविक लागत और किसानों से वसूली जाने वाली कीमत के बीच के अंतर को सब्सिडी के जरिए पूरा करती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 45 किलोग्राम यूरिया बैग का निर्धारित MRP 242 रुपये है, जबकि वित्त मंत्री ने कार्यक्रम में किसानों द्वारा चुकाई जाने वाली कीमत को लगभग 300 रुपये बताते हुए सरकार के सब्सिडी खर्च का उल्लेख किया।
किसानों को कैसे मिलती है यूरिया सब्सिडी
यूरिया सब्सिडी का लाभ किसानों को बाजार में सीधे नकद भुगतान के रूप में नहीं मिलता। सरकार यूरिया की लागत और नियंत्रित कीमत के बीच के अंतर की भरपाई उर्वरक कंपनियों और आयातकों को सब्सिडी के रूप में करती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी आने के बावजूद किसानों को खेती के लिए जरूरी यूरिया अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध रहे।
PM किसान और KCC पर भी सरकार का जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि किसानों को केवल सस्ती खाद उपलब्ध कराना ही सरकार की प्राथमिकता नहीं है, बल्कि खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत DBT के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के माध्यम से किसानों को संस्थागत ऋण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने की योजना
मदनपल्ले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आंध्र प्रदेश में कृषि और बागवानी क्षेत्र के विकास से जुड़ी पहलों पर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कृषि से जुड़े क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की आय और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
सरकार का लक्ष्य किसानों की लागत कम करना
यूरिया सब्सिडी के जरिए सरकार वैश्विक बाजार की कीमतों का सीधा असर किसानों पर पड़ने से रोकने की कोशिश कर रही है। वित्त मंत्री के मुताबिक, आवश्यक कृषि सब्सिडी में कमी न हो और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध होती रहे, इसके लिए केंद्र लगातार कदम उठा रहा है। इसके साथ PM किसान और KCC जैसी योजनाओं के जरिए किसानों को आर्थिक सहायता और ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।








