Telangana Assembly: DA एरियर पर तेलंगाना विधानसभा में हंगामा

Vihaan Patel
10 घंटे पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Sai Mehta
11 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Vivaan Gupta
11 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Trapti Tanwar
14 घंटे पहलेYeh rajneeti ka asli chehra hai.
Navya Nair
16 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Sai Mehta
17 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Neha Tripathi
17 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
तेलंगाना विधानसभा के मानसून सत्र में सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते यानी DA एरियर का मुद्दा उठाया गया। भाजपा विधायकों ने इस विषय पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया। निर्मल से भाजपा विधायक अलेटी महेश्वर रेड्डी, पालवई हरीश बाबू और पायल शंकर समेत अन्य भाजपा विधायकों ने कर्मचारियों के लंबित बकाये को महत्वपूर्ण जनहित का मुद्दा बताते हुए सदन में चर्चा की मांग की। भाजपा का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े इस वित्तीय मुद्दे पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इस प्रस्ताव के जरिए भाजपा ने विधानसभा की निर्धारित कार्यवाही रोककर DA एरियर पर तत्काल चर्चा कराने की मांग रखी।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाये पर BJP का जोर
भाजपा विधायकों का कहना है कि राज्य के सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का DA तथा उससे जुड़े एरियर लंबित हैं और इस वजह से कर्मचारियों के बीच असंतोष है। पार्टी ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाकर सरकार से बकाये की स्थिति और भुगतान की समयसीमा स्पष्ट करने की मांग की है। भाजपा नेताओं ने इसे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से सीधे जुड़ा आर्थिक मुद्दा बताया है। स्थगन प्रस्ताव का उद्देश्य सामान्य कार्यवाही के बजाय इस विषय पर तत्काल सदन में चर्चा कराना है। हालांकि सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर अंतिम रूप से क्या निर्णय लिया गया और DA एरियर के भुगतान को लेकर क्या समयसीमा बताई गई, इसकी तस्वीर आगे की सदन की कार्यवाही से स्पष्ट होगी। फिलहाल भाजपा की ओर से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है।
महेश्वर रेड्डी, हरीश बाबू और पायल शंकर ने उठाई आवाज
DA एरियर को लेकर स्थगन प्रस्ताव भाजपा के प्रमुख विधायकों की ओर से सामने आया है। निर्मल विधायक अलेटी महेश्वर रेड्डी, सिरपुर विधायक पालवई हरीश बाबू और आदिलाबाद विधायक पायल शंकर भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित बकाये पर चर्चा की मांग की। तेलंगाना सरकार की आधिकारिक विधानसभा सदस्य सूची में तीनों विधायकों को भाजपा के विधायक के रूप में दर्ज किया गया है। इस प्रस्ताव के जरिए भाजपा ने सरकार पर कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय दायित्वों को लेकर जवाब देने का दबाव बढ़ाया है। सदन में इस मुद्दे पर चर्चा होती है या नहीं और सरकार की ओर से क्या जवाब आता है, यह आगे की कार्यवाही में महत्वपूर्ण रहेगा।
विधानसभा में पहले से जारी है राजनीतिक टकराव
DA एरियर के मुद्दे के बीच तेलंगाना विधानसभा में राजनीतिक टकराव पहले से ही तेज बना हुआ है। पिछले दिनों BRS विधायकों ने पुलिस कार्रवाई, महिला विधायकों के साथ कथित दुर्व्यवहार और KCR को लेकर कांग्रेस नेताओं की कथित टिप्पणियों के मुद्दे पर विरोध किया था। बुधवार को BRS के 22 विधायक सदन में नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए, जिसके बाद उन्हें मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। इस घटनाक्रम का DA एरियर से अलग राजनीतिक संदर्भ है, लेकिन इससे विधानसभा में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़े तनाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे माहौल में भाजपा द्वारा कर्मचारियों के DA एरियर का मुद्दा उठाए जाने से सदन की राजनीति और अधिक गरमाने की संभावना है।
BRS के 22 विधायक निलंबित, सदन का माहौल गरमाया
तेलंगाना विधानसभा में बुधवार को 22 BRS विधायकों को मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किया गया। रिपोर्टों के अनुसार BRS सदस्य नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए थे और बार-बार अपनी मांगों को उठाते रहे। इसके बाद विधानसभा मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने निलंबन का प्रस्ताव रखा और स्पीकर गद्दाम प्रसाद कुमार ने कार्रवाई की। BRS की ओर से पुलिस कार्रवाई और पार्टी नेताओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग की जा रही थी। इस निलंबन के बाद विधानसभा में विपक्ष की भूमिका और सरकार के साथ टकराव को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। इसी माहौल के बीच भाजपा ने DA एरियर का मुद्दा उठाकर कर्मचारियों से जुड़े सवाल को अलग राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने रखा है।
DA एरियर पर सरकार के जवाब का इंतजार
भाजपा के स्थगन प्रस्ताव के बाद अब नजर इस बात पर है कि तेलंगाना सरकार लंबित DA एरियर को लेकर विधानसभा में क्या जवाब देती है। कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाये का मुद्दा सीधे तौर पर उनके आर्थिक हितों से जुड़ा है, इसलिए विपक्ष इसे सरकार पर दबाव बनाने के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा मान रहा है। भाजपा की मांग है कि इस विषय पर सामान्य कार्यवाही से अलग तत्काल चर्चा कर सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट करे। वहीं विधानसभा में चल रहे अन्य राजनीतिक विवादों के कारण सदन का माहौल पहले से तनावपूर्ण है। ऐसे में DA एरियर पर चर्चा और सरकार के जवाब का मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाजपा का स्थगन प्रस्ताव सामने आ चुका है और इस पर सदन की आगे की कार्यवाही पर नजर बनी हुई है।








