पीएम मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान: भारत-उज्बेकिस्तान के रिश्ते हुए और मजबूत

Myra Dubey
4 घंटे पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
Ayaan Khan
4 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Nidhi kumari
4 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Dev Kapoor
5 घंटे पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Neha Tripathi
6 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Taushif Shekh
7 घंटे पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Vihaan Patel
7 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Ishaan Tiwari
9 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Diya Gupta
9 घंटे पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Myra Dubey
11 घंटे पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Pranav Srivastava
11 घंटे पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रही है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च राजकीय सम्मान 'ओली दाराजली दुस्तलिक' (Order of Oliy Darajali Dostlik) से सम्मानित किया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच दोस्ती, आपसी विश्वास और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान के लिए दिया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों को समर्पित किया। दोनों देशों के नेताओं के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। इस सम्मान को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी तथा मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों के महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
यूरेनियम आपूर्ति को लेकर हुआ अहम समझौता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था पर सहमति बनी है। भारत अपने नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के विस्तार के लिए भरोसेमंद यूरेनियम आपूर्ति स्रोतों को मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है। यूरेनियम परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए महत्वपूर्ण ईंधन है और इसकी नियमित आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए काफी अहम मानी जाती है। उज्बेकिस्तान के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था से भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपने रणनीतिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। दोनों देशों के बीच यह समझौता ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस समझौते से दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रिश्ते हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारी में तब्दील
भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने मौजूदा रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाते हुए इसे 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। नई साझेदारी के तहत व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच नई साझेदारी आने वाले वर्षों में व्यापार और रणनीतिक सहयोग को और व्यापक बनाने का आधार तैयार कर सकती है।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर भी जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच हुई वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ सहयोग पहले से ही द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। मध्य एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत उज्बेकिस्तान के साथ सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना चाहता है। बातचीत में रक्षा सहयोग के साथ नई तकनीक, डिजिटल क्षेत्र और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के मुद्दे भी सामने आए। दोनों देशों का बढ़ता सुरक्षा सहयोग मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
व्यापार और तकनीकी सहयोग का नया रोडमैप
भारत और उज्बेकिस्तान ने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया है। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वच्छ ऊर्जा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी है। भारत अपनी डिजिटल तकनीक और सार्वजनिक डिजिटल सेवाओं के अनुभव को उज्बेकिस्तान के साथ साझा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। वहीं स्वच्छ ऊर्जा और नई तकनीक के क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के लिए आर्थिक अवसर पैदा कर सकता है। व्यापार को 2030 तक 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को नई गति देने वाला माना जा रहा है। इस रोडमैप के जरिए भारत मध्य एशिया के साथ अपने आर्थिक और तकनीकी संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
भारतीय नागरिकों के लिए वीजा सुविधा भी अहम
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते संबंधों के बीच भारतीय नागरिकों की यात्रा को आसान बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उज्बेकिस्तान की ओर से भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिनों तक की वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा को लेकर घोषणा की गई है। इससे दोनों देशों के बीच पर्यटन, व्यापार, शिक्षा और लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आसान यात्रा व्यवस्था से भारत और उज्बेकिस्तान के नागरिकों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान हुए समझौतों और घोषणाओं को दोनों देशों के संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। सर्वोच्च सम्मान, यूरेनियम आपूर्ति व्यवस्था और व्यापक रणनीतिक साझेदारी जैसे फैसलों ने इस यात्रा को भारत की मध्य एशिया नीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है।








