दिहाड़ी मजदूर के बेटे प्रवीण ने रचा इतिहास: Commonwealth Games 2026 में जीता सिल्वर मेडल

Ishaan Tiwari
0 सेकंड पहलेAisi success stories sabko inspire karti hain.
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेIs insaan ki journey bahut inspiring hai, salute!
तमिलनाडु के थिरुवरूर जिले के सेट्टीसाथिरम गांव के एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय एथलीट प्रवीण चित्रावेल (Praveen Chithravel) ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुषों की ट्रिपल जंप स्पर्धा में प्रवीण ने 16.58 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। बेहद कड़े मुकाबले में वह स्वर्ण पदक से मामूली अंतर से चूक गए, लेकिन उनकी इस उपलब्धि ने पूरे गांव और परिवार को गर्व से भर दिया।
खेतों में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं प्रवीण के पिता
प्रवीण चित्रावेल की सफलता के पीछे उनके परिवार का लंबा संघर्ष छिपा है। उनके पिता चित्रावेल खेतों में दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई और सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। परिवार की आर्थिक स्थिति भले ही मजबूत नहीं थी, लेकिन बेटे के खेल के सपने को पूरा करने के लिए पिता लगातार उसके साथ खड़े रहे।
साइकिल पर बैठाकर बेटे को ट्रेनिंग तक ले जाते थे पिता
प्रवीण के शुरुआती खेल सफर को याद करते हुए उनके पिता ने बताया कि वह बेटे को अपनी साइकिल पर बैठाकर ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं तक ले जाया करते थे। धीरे-धीरे प्रवीण ने स्थानीय स्तर से आगे बढ़ते हुए राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई। पिता के मुताबिक, उन्होंने बेटे को कदम-दर-कदम आगे बढ़ते देखा और आज उसकी सफलता उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।
सोना चूकने का मलाल, लेकिन सिल्वर पर पिता को गर्व
कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रवीण ने 16.58 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता। मुकाबला इतना करीबी रहा कि वह स्वर्ण पदक से मामूली अंतर से पीछे रह गए। परिवार को गोल्ड मेडल की उम्मीद थी, लेकिन प्रवीण के पिता का कहना है कि उन्हें बेटे की इस उपलब्धि पर बेहद गर्व है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रवीण आने वाले समय में स्वर्ण पदक जीतकर भारत और तमिलनाडु का नाम और ऊंचा करेंगे।
गांव ने भी प्रवीण को दिया परिवार जैसा साथ
प्रवीण की कामयाबी में उनके परिवार के साथ-साथ उनके गांव के लोगों, शिक्षकों और रिश्तेदारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पिता के अनुसार, गांव के युवाओं ने प्रवीण को अपने बच्चे की तरह प्रोत्साहित किया। शिक्षकों और रिश्तेदारों ने भी समय-समय पर उनका मार्गदर्शन किया। इसी सामूहिक सहयोग ने प्रवीण के आत्मविश्वास को मजबूत किया और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
एशियन गेम्स से यूथ ओलंपिक तक जीत चुके हैं पदक
प्रवीण चित्रावेल इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने एशियाई खेलों में कांस्य पदक, एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में रजत पदक और यूथ ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक हासिल किया है। वह पेरिस ओलंपिक 2024 में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। पुरुषों की ट्रिपल जंप में उनके नाम 17.37 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज है।
पिता की उम्मीद- अगली बार बेटा जीतेगा गोल्ड
कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर जीतने के बाद प्रवीण के पिता को अब अगले बड़े पदक की उम्मीद है। उनका कहना है कि अगली बार उनका बेटा स्वर्ण पदक जीत सकता है। साथ ही उनकी इच्छा है कि प्रवीण की सफलता से उनके गांव के कम से कम दस और युवा खेलों की दुनिया में आगे आएं और देश का नाम रोशन करें।
टीवी पर बेटे की जीत देखकर गांव में मना जश्न
प्रवीण की सिल्वर मेडल वाली उपलब्धि का सीधा प्रसारण परिवार और गांव के लोगों ने टीवी पर देखा। जैसे ही उनकी जीत की खबर सामने आई, सेट्टीसाथिरम गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। एक दिहाड़ी मजदूर के परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीतने वाले प्रवीण चित्रावेल की कहानी अब संघर्ष, मेहनत और सपनों को हकीकत में बदलने की प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।








