Kishau Dam MoU Brings Six States Together: यमुना बेसिन को मिलेगा जल प्रबंधन का लाभ

Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
किशाऊ मल्टीपर्पज डैम परियोजना को लेकर लंबे समय से चली आ रही अड़चनें अब दूर होती नजर आ रही हैं। 15 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार और छह भागीदार राज्यों के बीच परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए जाने हैं। इस प्रक्रिया में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं। परियोजना को लेकर जून में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सहमति बनी थी, जिसके बाद अब औपचारिक समझौते की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
₹15 हजार करोड़ की बहुउद्देशीय परियोजना
किशाऊ परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹15,000 करोड़ है और इसे टोंस नदी पर विकसित किया जा रहा है, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। परियोजना का उद्देश्य जल भंडारण के साथ जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति को मजबूत करना है। रिपोर्टों के मुताबिक यह परियोजना करीब 422 मेगावाट की जलविद्युत क्षमता से जुड़ी है और इससे लगभग 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होने की उम्मीद है। साथ ही सालाना करीब 517 मिलियन क्यूबिक मीटर पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है।
केंद्र उठाएगा जल घटक का 90 प्रतिशत खर्च
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा परियोजना की वित्तीय व्यवस्था है। तय व्यवस्था के अनुसार किशाऊ परियोजना के जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि बाकी 10 प्रतिशत खर्च छह भागीदार राज्यों के बीच साझा किया जाएगा। इस व्यवस्था से खास तौर पर हिमाचल प्रदेश पर पहले प्रस्तावित वित्तीय बोझ को लेकर बनी अड़चन दूर हुई है। इसी मुद्दे के कारण परियोजना लंबे समय से आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
यमुना बेसिन में बढ़ सकती है जल उपलब्धता
किशाऊ बांध टोंस नदी पर प्रस्तावित है और इसका संबंध सीधे यमुना बेसिन की जल उपलब्धता से है। परियोजना से मानसून के दौरान पानी के भंडारण और गैर-मानसूनी अवधि में जल प्रवाह को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे नीचे के क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ सकती है। रिपोर्टों के अनुसार परियोजना को यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह और जल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हिमाचल को भी मिलेगा परियोजना से लाभ
नई वित्तीय व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश को परियोजना के निर्माण में पहले प्रस्तावित पूंजीगत बोझ से राहत मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य को यमुना बेसिन से करीब 378 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का अधिकार मिलने की भी जानकारी है। इसके अलावा बिजली घटक से हिमाचल को भविष्य में सालाना करीब ₹600 करोड़ की आय होने का अनुमान बताया गया है। हालांकि ये परियोजना से जुड़े अनुमानित और समझौते के प्रावधान हैं, इसलिए इनके वास्तविक लाभ परियोजना के क्रियान्वयन के साथ स्पष्ट होंगे।
लंबे गतिरोध के बाद परियोजना को मिली रफ्तार
किशाऊ डैम परियोजना कई वर्षों से लागत, पानी के बंटवारे और राज्यों की जिम्मेदारियों को लेकर अटकी हुई थी। अब छह राज्यों और केंद्र के बीच सहमति बनने के बाद MoU की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इसके बाद परियोजना को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर आगे बढ़ाया जाना है। ऐसे में 15 सितंबर का समझौता इस लंबे समय से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





