UCC Push Triggers NDA Debate: 2029 से पहले UCC लागू करने का ऐलान

Sonu rai
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ravi sinha
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-led NDA की सरकार वाले सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। शाह ने इसे सरकार के प्रमुख एजेंडे के रूप में पेश किया और कहा कि कुछ राज्यों में UCC पहले ही लागू हो चुका है, जबकि बाकी राज्यों में इसे आगे बढ़ाया जाएगा। UCC का संबंध विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषयों से है। शाह के इस बयान के बाद अब इसकी राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया के साथ-साथ NDA के भीतर सहयोगी दलों की सहमति को लेकर बहस तेज हो गई है।
JDU ने बिहार को लेकर जताई असहमति
अमित शाह के बयान के बाद NDA की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड ने बिहार में UCC लागू करने के सवाल पर अलग रुख सामने रखा है। पार्टी की ओर से कहा गया है कि बिहार में इसे लागू करने को लेकर सहमति नहीं है और इस मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है। JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के नेतृत्व में पार्टी नेताओं के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करने की बात भी सामने आई है, ताकि पार्टी का पक्ष रखा जा सके। इससे साफ है कि UCC को लेकर NDA के भीतर अभी सभी सहयोगी दल एकमत नहीं हैं और बिहार को लेकर राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
TDP का रुख समर्थन से ज्यादा सावधानी वाला
आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी ने UCC पर तत्काल अंतिम समर्थन देने के बजाय सावधानीपूर्ण रुख अपनाया है। रिपोर्टों के मुताबिक TDP का कहना है कि पहले UCC का पूरा ड्राफ्ट सामने आना चाहिए और उसके बाद विभिन्न हितधारकों से चर्चा करके पार्टी अपनी अंतिम स्थिति तय करेगी। ऐसे में TDP को सीधे तौर पर शाह के ऐलान का पूर्ण समर्थन करने वाली पार्टी बताना सही नहीं होगा। गठबंधन की राजनीति में TDP की भूमिका महत्वपूर्ण है, इसलिए उसके रुख पर आगे होने वाली चर्चाओं को खास तौर पर देखा जा रहा है।
शिवसेना ने शाह के रुख का किया समर्थन
महाराष्ट्र में BJP की सहयोगी शिवसेना के शिंदे गुट ने अमित शाह के UCC वाले ऐलान का समर्थन किया है। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने UCC को समानता और न्याय के सिद्धांतों से जोड़ते हुए इसका समर्थन किया। पार्टी की ओर से इसे बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से भी जोड़ा गया है। इस तरह NDA में एक तरफ शिवसेना जैसे सहयोगी दल खुलकर समर्थन कर रहे हैं, वहीं JDU बिहार को लेकर असहमति जता रही है और TDP अंतिम ड्राफ्ट देखने के बाद फैसला लेने की बात कर रही है। इससे गठबंधन के भीतर UCC पर अलग-अलग राजनीतिक प्राथमिकताएं सामने आ रही हैं।
चिराग पासवान ने भी व्यापक चर्चा पर दिया जोर
UCC को लेकर NDA के भीतर केवल JDU और TDP ही सावधानी की बात नहीं कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के नेता चिराग पासवान ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों की राय लेने पर जोर दिया है। उनका रुख यह संकेत देता है कि UCC को लेकर सरकार और गठबंधन सहयोगियों के बीच व्यापक संवाद की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसे में 2029 की समयसीमा का ऐलान होने के बावजूद इसे लेकर राज्यों में राजनीतिक सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। आने वाले दिनों में सहयोगी दलों के साथ होने वाली बैठकों और UCC के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर उनकी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।
UCC पर NDA की एकजुटता की परीक्षा
अमित शाह के 2029 से पहले 21 NDA-शासित राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान ने अब इसे केवल BJP का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे गठबंधन के लिए राजनीतिक परीक्षा बना दिया है। BJP इसे समान कानूनी ढांचे और व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती है, जबकि सहयोगी दल अपने-अपने राज्यों की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रुख तय कर रहे हैं। फिलहाल UCC को लेकर NDA में समर्थन, सावधानी और विरोध—तीनों तरह के स्वर दिखाई दे रहे हैं। इसलिए आगे की तस्वीर UCC के ड्राफ्ट, राज्यों में होने वाली प्रक्रिया और सहयोगी दलों के साथ सहमति बनने पर निर्भर करेगी।






