सपा बोली- निशिकांत दुबे ने मांगी माफी: सपा के दावे को निशिकांत दुबे ने किया खारिज

सपा के दावे को निशिकांत दुबे ने किया खारिज
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Payal jadon

Payal jadon

0 सेकंड पहले

Sarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!

Monika Das

Monika Das

4 मिनट पहले

Bahut achhi reporting ki hai, keep it up!

Vivaan Gupta

Vivaan Gupta

2 घंटे पहले

Yeh rajneeti ka asli chehra hai.

Simran Arora

Simran Arora

4 घंटे पहले

Pehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!

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भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे और समाजवादी पार्टी के बीच चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी ने दावा किया कि अधिवक्ता केके पाल की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के जवाब में निशिकांत दुबे ने खेद जताते हुए माफी मांगी है। वहीं भाजपा सांसद ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से किसी भी प्रकार की माफी नहीं मांगी है। इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।


सपा का दावा- बिना शर्त माफी मांगी गई
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि निशिकांत दुबे ने बिना शर्त केके पाल से माफी मांग ली है। उन्होंने कहा कि अब भाजपा सांसद को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से भी सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। पार्टी ने इसे अपनी कानूनी और नैतिक जीत बताया।


निशिकांत दुबे का पलटवार
सपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने अखिलेश यादव से कोई माफी नहीं मांगी है। उन्होंने कहा, "मैं गंगा किनारे का आदमी हूं, मर्दानगी और मर्यादा में लड़ता हूं।" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कानूनी नोटिस केके पाल की ओर से आया था या अखिलेश यादव की ओर से। भाजपा सांसद ने सपा पर अफवाह फैलाने का आरोप भी लगाया।

 

जवाबी नोटिस में क्या कहा गया?
निशिकांत दुबे की ओर से भेजे गए जवाबी नोटिस में कहा गया कि उनकी किसी भी टिप्पणी का उद्देश्य केके पाल या किसी व्यक्ति की मानहानि करना नहीं था। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि किसी टिप्पणी से अनजाने में किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो उसके लिए हार्दिक खेद व्यक्त किया जाता है। हालांकि, साथ ही स्पष्ट किया गया कि यह खेद किसी भी प्रकार से गलती, मानहानि या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के समान नहीं माना जाए।


विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया गया कि राम मंदिर चंदा मामले के आरोपी रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव और अखिलेश यादव के बीच बातचीत हुई थी। इस पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए निशिकांत दुबे ने तंज कसा था, जिसके बाद अखिलेश यादव ने इसे अपनी छवि धूमिल करने की कोशिश बताते हुए पोस्ट हटाने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद केके पाल की ओर से मानहानि का नोटिस भेजा गया।


'माफी' बनाम 'खेद' पर जारी सियासी जंग
फिलहाल पूरा विवाद इस बात पर केंद्रित है कि जवाबी नोटिस में व्यक्त किया गया 'खेद' क्या वास्तव में 'माफी' माना जा सकता है या नहीं। समाजवादी पार्टी इसे अपनी जीत बताकर भाजपा पर निशाना साध रही है, जबकि निशिकांत दुबे का कहना है कि उन्होंने केवल अनावश्यक कानूनी विवाद से बचने के लिए औपचारिक खेद व्यक्त किया है, न कि अपनी गलती स्वीकार की है। ऐसे में यह मामला अब कानूनी बहस के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का भी विषय बन गया है।

 

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Payal jadon

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0 सेकंड पहले

Sarkar ko iske baare mein kuch karna chahiye!

Monika Das

Monika Das

4 मिनट पहले

Bahut achhi reporting ki hai, keep it up!

Vivaan Gupta

Vivaan Gupta

2 घंटे पहले

Yeh rajneeti ka asli chehra hai.

Simran Arora

Simran Arora

4 घंटे पहले

Pehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!

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