FCRA Amendment Bill 2026: FCRA संशोधन विधेयक पर JPC की पहली बैठक

Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेDigital India ka sapna aur karib aa raha hai.
Rohan Desai
0 सेकंड पहलेIs research se bahut logon ko faayda hoga.
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेNaye zamane ki nai technology — sab samjhein, sab apnayein.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेTechnology ke is new era mein India aage hai.
Vihaan Patel
0 सेकंड पहलेTechnology ke is new era mein India aage hai.
विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 की जांच के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC की पहली बैठक 18 सितंबर को नई दिल्ली में हो रही है। संसदीय कार्यसूची के अनुसार बैठक में गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि समिति के सदस्यों को विधेयक के प्रावधानों पर ब्रीफिंग देंगे। यह बैठक विधेयक की विस्तृत संसदीय समीक्षा की शुरुआत का महत्वपूर्ण चरण है। समिति में लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य शामिल हैं। इसके बाद विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर आगे चर्चा की जाएगी।
31 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता संजय जायसवाल
FCRA संशोधन विधेयक की जांच के लिए गठित JPC में कुल 31 सदस्य हैं। इनमें 21 सदस्य लोकसभा और 10 सदस्य राज्यसभा से हैं। भाजपा के लोकसभा सांसद संजय जायसवाल को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति को विधेयक के प्रावधानों की विस्तार से समीक्षा करनी है। संसदीय रिकॉर्ड में संजय जायसवाल को इस समिति का चेयरमैन दर्ज किया गया है।
गृह मंत्रालय के अधिकारी देंगे विधेयक पर जानकारी
18 सितंबर की बैठक के एजेंडे में गृह मंत्रालय के प्रतिनिधियों की ओर से समिति को विधेयक पर ब्रीफिंग देना शामिल है। अधिकारी प्रस्तावित संशोधनों और FCRA व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों की जानकारी समिति के सदस्यों के सामने रखेंगे। इसके बाद सांसद विधेयक से जुड़े सवाल और मुद्दे उठा सकते हैं। समिति की आगे की बैठकों में अलग-अलग प्रावधानों पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों में बदलाव प्रस्तावित
FCRA संशोधन विधेयक 2026 विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखता है। विधेयक में ऐसे संगठनों के FCRA प्रमाणपत्र समाप्त होने की स्थिति में विदेशी अंशदान और उससे जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अलावा कुछ उल्लंघनों के लिए अधिकतम सजा में बदलाव का भी प्रस्ताव है। विधेयक को 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और 12 अगस्त को इसे JPC को भेजा गया।
JPC करेगी विधेयक के प्रावधानों की विस्तृत जांच
अब संयुक्त संसदीय समिति विधेयक के अलग-अलग प्रावधानों पर विचार करेगी। समिति की प्रक्रिया में संबंधित मंत्रालय और अन्य हितधारकों के विचार भी शामिल किए जा सकते हैं। विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों के प्रभाव और प्रस्तावित बदलावों पर सदस्यों के बीच चर्चा होगी। समिति की समीक्षा पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट संसद के समक्ष रखी जाएगी। इसके बाद विधेयक पर आगे की संसदीय प्रक्रिया तय होगी।
संसद की प्रक्रिया के बाद तय होगा आगे का रास्ता
FCRA संशोधन विधेयक अभी संसदीय जांच के चरण में है और इसे अंतिम कानून का रूप नहीं मिला है। JPC की समीक्षा और रिपोर्ट के बाद विधेयक पर संसद में आगे की कार्रवाई होगी। समिति के विचार-विमर्श के दौरान विधेयक के प्रावधानों में बदलाव की सिफारिश भी की जा सकती है। इसलिए फिलहाल प्रस्तावित प्रावधानों को अंतिम कानून के रूप में नहीं देखा जा सकता। समिति की रिपोर्ट आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगी।






