PM Modi’s Multi-Generation Outreach: Gen-Z से महिलाओं और बुजुर्गों तक, PM मोदी का अलग-अलग पीढ़ियों से संवाद का तरीका

Ayaan Khan
57 मिनट पहलेBahut achhi reporting ki hai, keep it up!
Sai Mehta
8 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Sneha Menon
9 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Vivaan Gupta
11 घंटे पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Kunal Rao
13 घंटे पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Simran Arora
14 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
PM मोदी के संवाद का अलग अंदाज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। 2026 में वे 76 वर्ष के हो गए हैं। 2024 में उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लंबे राजनीतिक सफर के दौरान उनका संवाद करने का तरीका भी चर्चा में रहा है—युवाओं के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और क्रिएटर इकोसिस्टम से लेकर छात्रों के साथ संवाद तथा रेडियो कार्यक्रमों तक।
युवाओं तक डिजिटल माध्यम से पहुंच
Gen-Z के साथ संवाद में सोशल मीडिया और डिजिटल विषयों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। प्रधानमंत्री गेमिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप और डिजिटल क्रिएटर्स जैसे विषयों पर युवाओं से बातचीत करते रहे हैं। 2024 में नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड की शुरुआत भी डिजिटल क्रिएटर समुदाय को पहचान देने की पहल के रूप में हुई। इसमें स्टोरीटेलिंग, सामाजिक बदलाव, शिक्षा, गेमिंग और पर्यावरण समेत 20 से ज्यादा श्रेणियों में डिजिटल क्रिएटर्स को सम्मानित करने का प्रावधान था।
‘परीक्षा पे चर्चा’ से छात्रों से संवाद
छात्रों से सीधे संवाद के लिए ‘परीक्षा पे चर्चा’ एक प्रमुख कार्यक्रम बन चुका है। इसमें प्रधानमंत्री छात्रों के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों से भी परीक्षा, तनाव, आत्मविश्वास और पढ़ाई से जुड़े विषयों पर बातचीत करते हैं। 2026 के संस्करण में आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कुल 4,50,13,379 प्रतिभागियों ने पंजीकरण किया था। इनमें 4.19 करोड़ से अधिक छात्र, 24.84 लाख से ज्यादा शिक्षक और करीब 6.15 लाख अभिभावक शामिल थे। कार्यक्रम में छात्रों के सवाल लिए जाते हैं और पढ़ाई के साथ खेल, आराम, कौशल तथा रुचियों के संतुलन जैसे विषयों पर भी चर्चा होती है।
महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर फोकस
महिलाओं से जुड़ी योजनाएं और मुद्दे भी प्रधानमंत्री के सार्वजनिक संवाद का हिस्सा रहे हैं। स्वच्छता, घरों में शौचालय, उज्ज्वला योजना, महिला स्वयं सहायता समूह, लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी पहलों का उल्लेख उनके भाषणों और सरकारी कार्यक्रमों में होता रहा है। इन पहलों के जरिए महिलाओं की स्वास्थ्य सुविधाओं, घरेलू जीवन, आय और आर्थिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में जगह मिली है।
मन की बात’ से व्यापक श्रोताओं तक पहुंच
डिजिटल माध्यमों के साथ प्रधानमंत्री पारंपरिक संचार माध्यमों का भी इस्तेमाल करते हैं। ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम के जरिए वे देशभर के लोगों से नियमित संवाद करते हैं। इस कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय नवाचारों, ग्रामीण क्षेत्रों और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की कहानियों का उल्लेख किया जाता है। इससे रेडियो जैसे पारंपरिक माध्यम के जरिए भी व्यापक श्रोताओं तक पहुंच बनाई जाती है।
स्थानीय भाषा और संस्कृति का इस्तेमाल
प्रधानमंत्री के भाषणों में स्थानीय संदर्भों का इस्तेमाल भी देखने को मिलता है। अलग-अलग राज्यों में कार्यक्रमों के दौरान वहां की भाषा, त्योहार, परंपराओं, खान-पान और स्थानीय व्यक्तित्वों का उल्लेख किया जाता है। इसके अलावा काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में राम मंदिर और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे विषयों के जरिए सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से जुड़े मुद्दे भी उनके सार्वजनिक संवाद का हिस्सा रहे हैं।
संवाद के लिए कई माध्यमों का इस्तेमाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक संवाद में एक साथ कई माध्यम दिखाई देते हैं—युवाओं के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल क्रिएटर प्लेटफॉर्म, छात्रों के लिए ‘परीक्षा पे चर्चा’, महिलाओं से जुड़ी योजनाएं और मुद्दे तथा व्यापक श्रोताओं के लिए ‘मन की बात’ जैसे पारंपरिक माध्यम। इस तरह अलग-अलग आयु वर्गों और सामाजिक समूहों तक पहुंचने के लिए संवाद के विषय और माध्यम अलग-अलग रखे जाते हैं।






