टीएमसी में बड़ा बवाल: बागी गुट ने ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाया

बागी गुट ने ममता बनर्जी को अध्यक्ष पद से हटाया
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Vaishali shinde

Vaishali shinde

17 घंटे पहले

Pehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!

Rohan Desai

Rohan Desai

17 घंटे पहले

Is maamle mein sarkari paksh kya hai?

Ravi sinha

Ravi sinha

17 घंटे पहले

Is maamle mein sarkari paksh kya hai?

Payal jadon

Payal jadon

21 घंटे पहले

Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

Ananya Sharma

Ananya Sharma

22 घंटे पहले

Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

Nidhi kumari

Nidhi kumari

1 दिन पहले

Is maamle mein sarkari paksh kya hai?

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी गुट ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पार्टी के चेयरपर्सन पद से हटाने और अभिषेक बनर्जी को महासचिव पद से निलंबित करने का दावा किया है। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और टीएमसी के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष को खुलकर सामने ला दिया है।

 

बागी गुट की बैठक में लिए गए अहम फैसले
सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र के बाद न्यूटाउन स्थित एक होटल में बागी नेताओं की विशेष बैठक आयोजित की गई। बागी गुट का दावा है कि बैठक में करीब 60 विधायक, 70 से अधिक पूर्व पार्षद, कई जिला अध्यक्ष और पूर्व विधायक शामिल हुए। इस दौरान संगठन के पुनर्गठन और नए नेतृत्व को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
बैठक में 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन की घोषणा की गई और अरूप रॉय को संगठन का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। साथ ही अभिषेक बनर्जी को ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी पद से हटाने की घोषणा की गई।

 

नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन
बागी गुट द्वारा घोषित नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में अरूप रॉय को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं संदीपन साहा, जावेद खान और ऋताब्रता बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास और रथिन घोष को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। बागी नेताओं का कहना है कि पार्टी को नई दिशा और मजबूत संगठनात्मक ढांचे की आवश्यकता है, जिसके लिए यह बदलाव जरूरी था।

 

पार्टी के बैंक खातों पर भी नजर
सूत्रों के अनुसार, बागी गुट अब पार्टी की संगठनात्मक वैधता के साथ-साथ टीएमसी के बैंक खातों और अन्य संसाधनों पर दावा करने की कानूनी संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि इसके लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है। अगले 21 दिनों में विभिन्न फ्रंटल संगठनों के गठन की भी योजना बनाई गई है।

 

टीएमसी नेतृत्व ने दावों को किया खारिज
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक नेतृत्व ने बागी गुट के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा कि कुछ लोग अवैध रूप से पार्टी के नाम का उपयोग कर रहे हैं और उन्हें संगठन के आधिकारिक निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व पूरी तरह ममता बनर्जी के साथ खड़ा है और कुछ असंतुष्ट नेताओं की गतिविधियों से पार्टी की एकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

 

बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है अनिश्चितता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी के भीतर उभरा यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। यदि बागी गुट अपनी राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक समर्थन साबित करने में सफल रहता है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल दोनों गुटों के बीच संगठन, नेतृत्व और वैधता की लड़ाई तेज होती नजर आ रही है।
हालांकि, बागी गुट द्वारा किए गए दावों और संख्या बल को लेकर आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस राजनीतिक संघर्ष पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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Vaishali shinde

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17 घंटे पहले

Pehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!

Rohan Desai

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17 घंटे पहले

Is maamle mein sarkari paksh kya hai?

Ravi sinha

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17 घंटे पहले

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Payal jadon

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21 घंटे पहले

Sarkar ko public ko jawab dena chahiye.

Ananya Sharma

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22 घंटे पहले

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Nidhi kumari

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1 दिन पहले

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