शीतकालीन सत्र में बड़ा फैसला: पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई

पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई
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Anil Sen

Anil Sen

8 मिनट पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Sonu rai

Sonu rai

15 मिनट पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

33 मिनट पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Anika Rajput

Anika Rajput

36 मिनट पहले

Desh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.

Ritika Ghosh

Ritika Ghosh

40 मिनट पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Ayaan Khan

Ayaan Khan

48 मिनट पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Myra Dubey

Myra Dubey

8 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

9 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

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संसदीय जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की कार्रवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना गया है। सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि उनके इस्तीफे के बाद भी इस कार्रवाई की संवैधानिक स्थिति को लेकर कानूनी सवाल बने हुए हैं। प्रस्ताव आगे बढ़ने की स्थिति में वर्मा को संसद में अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिल सकता है।


कैश कांड से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला मार्च 2025 में दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद सामने आया था। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को परिसर के एक स्टोररूम में बड़ी मात्रा में अधजली और बेहिसाब नकदी मिली थी। घटना के बाद मामले की जांच शुरू हुई और वर्मा की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठे। बाद में सुप्रीम कोर्ट की इन-हाउस प्रक्रिया और संसदीय जांच के जरिए आरोपों की पड़ताल की गई। इसी विवाद ने आगे चलकर उनके खिलाफ संसद में हटाने की प्रक्रिया का रास्ता तैयार किया।


जांच समिति ने तीनों आरोप माने साबित
लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित तीन सदस्यीय संसदीय जांच समिति ने अगस्त 2026 में अपनी रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में पेश की। समिति ने कहा कि वर्मा के आधिकारिक आवास से मिली पर्याप्त मात्रा में बेहिसाब नकदी की मौजूदगी को वह संतोषजनक तरीके से स्पष्ट नहीं कर सके। रिपोर्ट में महत्वपूर्ण सामग्री को सुरक्षित रखने में चूक और घटना को लेकर दिए गए उनके स्पष्टीकरण को भी असंतोषजनक बताया गया। समिति ने तीनों आरोपों को साबित माना, हालांकि रिपोर्ट ने यह निष्कर्ष नहीं निकाला कि आपराधिक कानून के अर्थ में नकदी व्यक्तिगत रूप से वर्मा की थी।

 

इस्तीफे के बाद भी स्थिति असमंजस में
जस्टिस यशवंत वर्मा ने अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। उनके इस्तीफे के बाद यह सवाल उठा कि क्या उनके खिलाफ चल रही संसदीय हटाने की प्रक्रिया आगे जारी रह सकती है। सामान्य तौर पर किसी हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज के इस्तीफे के प्रभाव को लेकर अलग कानूनी स्थिति होती है। लेकिन इस मामले में इस्तीफा संसदीय हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद दिया गया था, जिसके कारण उनकी औपचारिक स्थिति को लेकर विवाद बना हुआ है। सरकारी सूत्रों ने इसी आधार पर शीतकालीन सत्र में कार्रवाई आगे बढ़ाने की संभावना जताई है।


शीतकालीन सत्र पर टिकी नजर
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार महाभियोग प्रस्ताव को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल मौजूदा मामले में कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि न्यायिक पद पर गंभीर अनियमितताओं के मामलों में एक मिसाल कायम करना भी बताया जा रहा है। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो संसद में इस पर विस्तृत चर्चा और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। वर्मा को भी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपना बचाव रखने का अवसर मिलने की बात सामने आई है।


संसद में कार्रवाई का अगला चरण
यशवंत वर्मा के खिलाफ हटाने की प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद पहले ही प्रस्ताव का समर्थन कर चुके हैं। लोकसभा में 146 सांसदों के हस्ताक्षर वाले प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के बाद तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। अब समिति की रिपोर्ट में आरोप साबित होने के बाद आगे की संसदीय कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि इस्तीफे के बाद महाभियोग की संवैधानिक वैधता को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस जारी है। इसलिए शीतकालीन सत्र में होने वाली कार्रवाई इस मामले के साथ-साथ न्यायिक जवाबदेही की व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

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Anil Sen

Anil Sen

8 मिनट पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Sonu rai

Sonu rai

15 मिनट पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Dhruv Bhatt

Dhruv Bhatt

33 मिनट पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

Anika Rajput

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36 मिनट पहले

Desh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.

Ritika Ghosh

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40 मिनट पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Ayaan Khan

Ayaan Khan

48 मिनट पहले

Bharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.

Myra Dubey

Myra Dubey

8 घंटे पहले

Is niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.

Yash Kulkarni

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9 घंटे पहले

Bharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.

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