जंतर-मंतर पर ऑटो चालकों का बड़ा प्रदर्शन: जंतर-मंतर पर ऑटो यूनियन का हल्लाबोल

जंतर-मंतर पर ऑटो यूनियन का हल्लाबोल
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Pranav Srivastava

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0 सेकंड पहले

Jai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.

Yash Kulkarni

Yash Kulkarni

0 सेकंड पहले

India ki progress dekh ke dil khush ho gaya!

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर 17 अगस्त 2026 को ऑटो और टैक्सी चालकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। भारतीय मजदूर संघ से जुड़े दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में चालक प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने परिवहन क्षेत्र से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। चालकों की सबसे बड़ी मांग ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए अलग वेलफेयर बोर्ड का गठन करना है। यूनियन का कहना है कि वेलफेयर बोर्ड बनने से चालकों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा। प्रदर्शन के दौरान चालकों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार से जल्द कार्रवाई करने की अपील की।


ऑटो-टैक्सी वेलफेयर बोर्ड बनाने की मांग
ऑटो यूनियन ने दिल्ली सरकार से चुनावी वादे के मुताबिक ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए वेलफेयर बोर्ड बनाने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि बड़ी संख्या में चालक लंबे समय से परिवहन क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उनके लिए सामाजिक सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि प्रस्तावित बोर्ड के माध्यम से चालकों और उनके परिवारों को चिकित्सा, शिक्षा और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं से जोड़ा जाए। यूनियन नेताओं ने सरकार से इस बोर्ड का गठन जल्द से जल्द करने की अपील की। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान इस मांग को लेकर चालकों ने जमकर नारेबाजी की।


बढ़ी फिटनेस फीस वापस लेने की मांग
प्रदर्शन में पुराने व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस फीस में बढ़ोतरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। ऑटो चालकों ने 20 साल से अधिक पुराने वाहनों के लिए बढ़ाई गई 800 रुपये की फिटनेस फीस का विरोध किया। यूनियन ने सरकार से इस बढ़ोतरी को तत्काल वापस लेने की मांग की है। चालकों का कहना है कि पहले से बढ़ती लागत और सीमित आय के बीच अतिरिक्त फीस का बोझ उनके लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने परिवहन विभाग से फिटनेस प्रक्रिया और शुल्क व्यवस्था को लेकर भी राहत देने की मांग की। यूनियन का कहना है कि सरकार को छोटे वाहन मालिकों और चालकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर फैसले लेने चाहिए।

 

प्राइवेट बाइक टैक्सी पर प्रतिबंध की मांग
ऑटो यूनियन ने निजी नंबर प्लेट वाली बाइक टैक्सियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सफेद नंबर प्लेट वाली निजी बाइक से व्यावसायिक यात्री परिवहन पर तत्काल रोक लगाई जाए। यूनियन का कहना है कि इस तरह चल रही बाइक टैक्सियों से अधिकृत ऑटो और टैक्सी चालकों की आजीविका प्रभावित हो रही है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और परिवहन विभाग से नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है। यूनियन नेताओं ने कहा कि व्यावसायिक परिवहन के लिए निर्धारित नियमों का पालन सभी वाहन संचालकों के लिए जरूरी होना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान चालकों ने सरकार के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की।


परिवहन विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग
ऑटो चालकों ने दिल्ली परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को भी प्रदर्शन में उठाया। यूनियन ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और चालकों के कथित उत्पीड़न पर रोक लगाने की मांग की। इसके साथ ही चालकों के काम करने के घंटों को निर्धारित करने की मांग भी सामने रखी गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक काम करने के कारण चालकों पर आर्थिक और शारीरिक दबाव बढ़ता है। यूनियन ने सरकार से चालकों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां और स्पष्ट नियम तैयार करने की अपील की। संगठन का कहना है कि परिवहन व्यवस्था में सुधार के साथ चालकों के अधिकारों और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।


प्रदर्शन के बावजूद आम जनता को बड़ी परेशानी नहीं
जंतर-मंतर पर ऑटो चालकों के प्रदर्शन के बावजूद दिल्ली की परिवहन व्यवस्था पर बड़ा असर देखने को नहीं मिला। बड़ी संख्या में ऑटो और कैब सड़कों पर चलते रहे, जिससे आम यात्रियों को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और मेट्रो स्टेशनों के आसपास भी परिवहन सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहीं। यूनियन की ओर से भी कहा गया था कि प्रदर्शन का उद्देश्य आम जनता को परेशान करना नहीं है। हालांकि संगठन ने सरकार को चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। यूनियन ने जरूरत पड़ने पर भविष्य में चक्का जाम और बड़े आंदोलन की रणनीति अपनाने के संकेत भी दिए हैं।

 

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