भोजशाला में 721 साल बाद शुक्रवार को महाआरती: हाई कोर्ट के फैसले के बाद बदली तस्वीर

Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेYeh sirf ek ghar ki nahi, pure samaj ki baat hai.
Navya Nair
0 सेकंड पहलेLogon ki madad karna hi asli dharam hai.
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद धार स्थित भोजशाला में शुक्रवार को 721 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद मां वाग्देवी की महाआरती और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। हाई कोर्ट द्वारा हिंदू पक्ष को वर्षभर निर्बाध पूजा का अधिकार दिए जाने के बाद यह पहला शुक्रवार है, जब भोजशाला परिसर मां वाग्देवी के जयकारों और धार्मिक अनुष्ठानों से गूंज उठा। पूरे धार जिले में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया।
सुबह से उमड़े श्रद्धालु, गर्भगृह में विशेष सजावट
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोजशाला पहुंचने लगे। परिसर के गर्भगृह को फूलों और धार्मिक सजावट से सजाया गया। मां सरस्वती और मां वाग्देवी के प्रतीकात्मक स्वरूप के समक्ष विशेष पूजा, आरती और वैदिक मंत्रोच्चार किए गए। दोपहर में ज्योति मंदिर से श्रद्धालुओं का जत्था भोजशाला दर्शन के लिए रवाना हुआ। वर्षों बाद शुक्रवार को हिंदू समुदाय को खुले रूप से पूजा-अर्चना का अवसर मिलने पर लोगों ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया।
हाई कोर्ट के फैसले से बदली व्यवस्था
अब तक प्रत्येक शुक्रवार को भोजशाला परिसर में मुस्लिम समुदाय को जुमे की नमाज की अनुमति दी जाती थी। हालांकि, हाई कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद पहली बार शुक्रवार को परिसर में नमाज नहीं हुई और पूरे दिन पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। परिसर में लगे उस पुराने बोर्ड को भी हटाया गया, जिस पर शुक्रवार को हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का उल्लेख था। हिंदू संगठनों ने इसे लंबे संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। मुस्लिम पक्ष की ओर से काज़ी मोइनुद्दीन और संबंधित संगठनों ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट का निर्णय पुरातात्विक तथ्यों और 'प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991' की भावना के विपरीत है। वहीं, हिंदू पक्ष ने किसी भी एकतरफा आदेश से बचने के लिए पहले ही सुप्रीम कोर्ट में केविएट याचिका दाखिल कर रखी है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, 1500 से अधिक जवान तैनात
संवेदनशील स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क है। धार शहर और भोजशाला परिसर के आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा के अनुसार, हाई कोर्ट के आदेश का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा। शहर में 1500 से अधिक पुलिस और सुरक्षा बल के जवान तैनात किए गए हैं, जबकि आसपास के जिलों से भी अतिरिक्त बल बुलाया गया है।
कमाल मौलाना उर्स का भी आयोजन, सौहार्द बनाए रखने की अपील
भोजशाला परिसर से सटे कमाल मौलाना दरगाह क्षेत्र में शुक्रवार को उर्स का आयोजन भी किया गया। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों ने बताया कि उर्स की सूचना पहले ही प्रशासन को दे दी गई थी। दरगाह परिसर में जियारत और लंगर की व्यवस्था की गई है। सोसायटी ने सभी समुदायों से शांति, भाईचारे और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
दशकों पुराने विवाद का नया अध्याय
धार की भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और कानूनी विवाद का केंद्र रही है। हाई कोर्ट के हालिया फैसले ने इस विवाद को नया मोड़ दिया है। जहां एक ओर हिंदू पक्ष इसे धार्मिक अधिकारों की जीत मान रहा है, वहीं मुस्लिम पक्ष न्यायिक लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक ले गया है। अब पूरे देश की नजरें सर्वोच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जो इस ऐतिहासिक विवाद की दिशा तय कर सकती है।







