पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन: तिहाड़ में उम्रकैद काट रहे थे

Anil Sen
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Ritika Ghosh
2 घंटे पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Vivaan Gupta
3 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Riya Jain
4 घंटे पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Aditya Verma
5 घंटे पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Diya Gupta
5 घंटे पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Aditya Verma
7 घंटे पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। तिहाड़ जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर उनकी हालत बेहद गंभीर बताई गई थी। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल प्रशासन और जेल सूत्रों ने उनके निधन की पुष्टि की है। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
सफदरजंग अस्पताल में हुई मौत
जानकारी के अनुसार सज्जन कुमार को गुरुवार सुबह तबीयत बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल के आपातकालीन विभाग में लाया गया था। उन्हें होश में परेशानी और गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के बाद अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें जीवन रक्षक उपचार देने की कोशिश की। इलाज के दौरान दोपहर करीब 12:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। बताया गया कि वह लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर और पार्किंसंस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। अस्पताल में उपचार के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका।
1984 दंगा मामले में काट रहे थे उम्रकैद
सज्जन कुमार 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। दिसंबर 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने पालम कॉलोनी मामले में पांच सिखों की हत्या के मामले में उन्हें दोषी ठहराया था। अदालत के फैसले के बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्हें जेल भेजा गया और वह सजा काट रहे थे। फरवरी 2025 में भी एक अन्य 1984 दंगा मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उनके खिलाफ दंगों से जुड़े मामलों की कानूनी प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही।
कभी दिल्ली के बड़े कांग्रेस नेता थे
सज्जन कुमार का राजनीतिक सफर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा था। वह दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और तीन बार लोकसभा सांसद चुने गए थे। राजनीति में आने से पहले उनके जीवन का शुरुआती दौर सामान्य पृष्ठभूमि से जुड़ा बताया जाता है। समय के साथ उन्होंने दिल्ली की राजनीति में अपना मजबूत प्रभाव बनाया। हालांकि 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों ने उनके राजनीतिक जीवन पर गहरा असर डाला। अदालत से दोषी ठहराए जाने के बाद उनका राजनीतिक करियर पूरी तरह बदल गया।
निधन पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
सज्जन कुमार के निधन के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी। दूसरी ओर सिख संगठनों की ओर से 1984 के दंगों में मारे गए लोगों और पीड़ित परिवारों का मुद्दा उठाया गया। सिख संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि 1984 की घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पीड़ितों को मिले न्याय और लंबी चली कानूनी प्रक्रिया का भी उल्लेख किया। सज्जन कुमार का निधन ऐसे समय हुआ है जब 1984 के दंगों से जुड़े मामलों की चर्चा एक बार फिर सामने आई है।
अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर
सज्जन कुमार के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया दिल्ली में पूरी की गई। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से उनके अंतिम संस्कार को लेकर जानकारी दी गई थी। उनके निधन के बाद कांग्रेस नेताओं और समर्थकों की ओर से शोक संवेदनाएं व्यक्त की गईं। वहीं 1984 के दंगा पीड़ितों से जुड़े संगठनों ने उनके निधन को अलग नजरिए से देखा। कानूनी जानकारों के मुताबिक किसी आरोपी या दोषी की मृत्यु के बाद उसके खिलाफ लंबित व्यक्तिगत आपराधिक कार्यवाही आम तौर पर आगे नहीं चलती। सज्जन कुमार के निधन के साथ उनके खिलाफ लंबित मामलों की कानूनी स्थिति भी अब इसी आधार पर प्रभावित होगी।



