Goa Marriage Readiness Course: गोवा कॉलेज में शादी की तैयारी का खास कोर्स शुरू

Myra Dubey
22 घंटे पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
Sneha Menon
1 दिन पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Krishna Yadav
1 दिन पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Navya Nair
1 दिन पहलेYeh haalat bahut chintajanak hai, jaldi karyawahi ho.
Arjun Singh
1 दिन पहलेPeedit logo ke saath poori tarah sahmat hoon.
Saanvi Pandey
1 दिन पहलेAam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.
Kunal Rao
1 दिन पहलेHum is cause ke saath hain, awaaz uthani chahiye.
गोवा कॉलेज की अनूठी पहल
भारत में विवाह को सात जन्मों का साथ माना जाता है। यहां सामाजिक ताना-बाना मजबूत होने के कारण संबंध-विच्छेद की दर दुनिया के कई देशों की तुलना में कम रही है। हालांकि, आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच दांपत्य जीवन में अलगाव के मामले चिंता का विषय बन रहे हैं।
रिश्तों की मजबूती के लिए विशेष कोर्स
बढ़ते वैवाहिक अलगाव के बीच गोवा के एक कॉलेज ने युवाओं को स्वस्थ और मजबूत रिश्तों की समझ देने की पहल की है। पणजी स्थित गोवा कॉलेज ऑफ होम साइंस के मानव विकास और परिवार अध्ययन विभाग ने "मैरिज रेडिनेस: प्रिपेयरिंग फॉर हेल्दी एंड लास्टिंग रिलेशनशिप्स" नाम से विशेष सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है।
दो दिसंबर से शुरू होगा 15 दिन का कोर्स
कॉलेज के प्रिंसिपल महेश पाई के अनुसार, यह 15 दिवसीय कोर्स 2 से 17 दिसंबर, 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह केवल शादी की रस्मों और समारोह की तैयारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आपसी समझ, प्रतिबद्धता और वैवाहिक जीवन की वास्तविक जिम्मेदारियों को समझने पर जोर दिया जाएगा।
गोवा में विवाह से जुड़े मामलों के आंकड़े
गोवा के विधि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2025 के बीच राज्य की अदालतों में विवाह और तलाक से जुड़े 3,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें अकेले वर्ष 2024 में 947 मामले शामिल थे।
प्री-मैरिज काउंसलिंग पर सरकार का विचार
हाल ही में पणजी में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी राज्य में बढ़ते तलाक के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए प्री-मैरिज काउंसलिंग शुरू करने की मंशा जताई थी।
कोर्स में रिश्तों से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन
कॉलेज के ब्रोशर के अनुसार, कोर्स के सत्रों में युवाओं को डेटिंग के उद्देश्य और उसकी बदलती प्रकृति, आत्म-जागरूकता और अपनेपन की जरूरत जैसे विषयों पर जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही रिश्तों पर पुरुषत्व और स्त्रीत्व के प्रभाव तथा शादी के समारोह और वास्तविक वैवाहिक जीवन के बीच अंतर को भी समझाया जाएगा।
किन लोगों के लिए है यह कोर्स?
यह कोर्स स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के साथ-साथ उन सभी अविवाहित युवाओं के लिए खुला है, जो भविष्य में स्वस्थ, मजबूत और खुशहाल रिश्ता बनाना चाहते हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को रिश्तों की भावनात्मक और व्यावहारिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है।
वैवाहिक जीवन के लिए मानसिक तैयारी जरूरी
यह पहल इस बात पर ध्यान दिलाती है कि जिस तरह अच्छे करियर के लिए शिक्षा और तैयारी जरूरी है, उसी तरह खुशहाल पारिवारिक जीवन के लिए भी मानसिक और भावनात्मक तैयारी महत्वपूर्ण है। आपसी समझ, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से रिश्तों को मजबूत आधार मिल सकता है।








