100 करोड़ नागरिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने सराहा भारत का मॉडल

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने सराहा भारत का मॉडल
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Saanvi Pandey

Saanvi Pandey

18 घंटे पहले

Aise logon ko support karna humara farz hai.

Aditya Verma

Aditya Verma

21 घंटे पहले

Yeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.

Sneha Menon

Sneha Menon

22 घंटे पहले

Community ko mil ke aage aana hoga is mudde par.

Neha Tripathi

Neha Tripathi

23 घंटे पहले

Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

Simran Arora

Simran Arora

1 दिन पहले

Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

Anjali Patil

Anjali Patil

1 दिन पहले

Logon ki madad karna hi asli dharam hai.

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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 में भारत का सामाजिक सुरक्षा दायरा (Social Protection Coverage) 100 करोड़ (1 अरब) से अधिक नागरिकों तक पहुंच गया है, जो देश की कुल आबादी का 68.4% है। इसे भारत के कल्याणकारी इतिहास का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने भी औपचारिक रूप से मान्यता देते हुए भारत के प्रयासों की सराहना की है। सरकार के अनुसार, पिछले एक दशक में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार ने करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य, बीमा, पेंशन और आर्थिक सुरक्षा का लाभ पहुंचाया है।


2015 से 2026 तक चार गुना बढ़ा दायरा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में केवल 25 करोड़ नागरिक (19%) सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में थे। वर्ष 2026 तक यह संख्या बढ़कर 100 करोड़ से अधिक (68.4%) हो गई है। हैदराबाद में आयोजित BRICS श्रम एवं रोजगार मंत्रियों की बैठक में ILO के महानिदेशक गिल्बर्ट एफ. हौंगबो ने इस उपलब्धि को विकासशील देशों के लिए एक आदर्श मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि भारत का अनुभव South-South Cooperation के माध्यम से अन्य देशों के साथ साझा किया जा सकता है।


ई-श्रम, EPFO और ESIC बने सबसे बड़े आधार
सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने में कई डिजिटल और संस्थागत प्लेटफॉर्म की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ई-श्रम (e-Shram) पोर्टल पर अब तक 31.7 करोड़ से अधिक असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिन्हें विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया है। वहीं EPFO के पास 8 करोड़ से अधिक सक्रिय सदस्य और लगभग 80 लाख पेंशनभोगी हैं। इसके अलावा ESIC के माध्यम से 15 करोड़ से अधिक बीमित व्यक्तियों और उनके आश्रितों को चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है। इन संस्थाओं ने संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा कवरेज को व्यापक बनाया है।

 

 जनकल्याण योजनाओं ने बदली करोड़ों लोगों की जिंदगी
सरकार की आयुष्मान भारत (PM-JAY), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) और अटल पेंशन योजना (APY) जैसी योजनाओं ने सामाजिक सुरक्षा के विस्तार में अहम योगदान दिया है। इन योजनाओं के माध्यम से गरीब, निम्न आय वर्ग, छोटे व्यापारियों, किसानों, प्रवासी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा और वृद्धावस्था पेंशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।


रोजगार सृजन और भविष्य की बड़ी योजना
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया के अनुसार, पिछले एक दशक में देश में करीब 17 करोड़ रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। सरकार अब 'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना' के माध्यम से अगले दो वर्षों में औपचारिक क्षेत्र में 3.5 करोड़ नए रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि रोजगार और सामाजिक सुरक्षा दोनों को साथ लेकर चलने से देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति और मजबूत होगी।


दुनिया के लिए बना भारत का सामाजिक सुरक्षा मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल गवर्नेंस, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT), ई-श्रम, EPFO, ESIC और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन ने भारत को सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। ILO द्वारा इस उपलब्धि की सराहना भारत के लिए बड़ी अंतरराष्ट्रीय मान्यता मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य शेष पात्र नागरिकों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाकर 'विकसित भारत' के लक्ष्य को और मजबूत करना है।

 

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Saanvi Pandey

Saanvi Pandey

18 घंटे पहले

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21 घंटे पहले

Yeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.

Sneha Menon

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22 घंटे पहले

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Neha Tripathi

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23 घंटे पहले

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1 दिन पहले

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1 दिन पहले

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