वायनाड त्रासदी के दो साल, दर्द बरकरार: 149 परिवार अब भी घर के इंतजार में

Anika Rajput
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेHamara desh sahi direction mein ja raha hai, umeed hai.
Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Anika Rajput
0 सेकंड पहलेDesh ke navyuvak ko aage aana chahiye is mudde par.
Ada khan
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
केरल के वायनाड में 30 जुलाई 2024 को आई विनाशकारी भूस्खलन त्रासदी को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार आज भी उस भयावह रात को नहीं भूल पाए हैं। चूरलमला, मुंडक्कई और पुंचिरिमट्टम गांवों में आई आपदा ने सैकड़ों परिवारों की दुनिया उजाड़ दी थी। कई लोगों ने अपने माता-पिता, बच्चों और रिश्तेदारों को खो दिया। आज भी उस रात की चीखें और तबाही की तस्वीरें लोगों के दिलों में ताजा हैं। पीड़ितों का कहना है कि समय बीत गया, लेकिन दर्द आज भी कम नहीं हुआ।
149 परिवारों को अब भी अपने घर का इंतजार
राज्य सरकार ने पहले चरण में 178 प्रभावित परिवारों को पुनर्वास टाउनशिप में नए घर उपलब्ध कराए हैं। हालांकि अब भी 149 पात्र परिवार स्थायी आवास मिलने का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल ये परिवार किराए के छोटे मकानों या अस्थायी आश्रयों में रहने को मजबूर हैं। बढ़ते किराए और सीमित सुविधाओं के कारण उनका जीवन मुश्किलों से भरा हुआ है। पीड़ितों ने सरकार से जल्द पुनर्वास प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है। प्रशासन का कहना है कि अगले चरण में घरों का आवंटन जल्द किया जाएगा।
298 लोगों की मौत, कई अब भी लापता
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वायनाड भूस्खलन में 298 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 32 लोग आज भी लापता हैं। इस भीषण आपदा में 1,555 से अधिक घर पूरी तरह नष्ट हो गए और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। कई गांवों का अस्तित्व एक ही रात में खत्म हो गया। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और बड़े पैमाने पर राहत शिविर लगाए गए। यह त्रासदी केरल के इतिहास की सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में गिनी जाती है।
सेना और बचाव दल बने हजारों लोगों की उम्मीद
आपदा के बाद भारतीय सेना, NDRF, SDRF, फायर एंड रेस्क्यू, पुलिस और हजारों स्वयंसेवकों ने युद्धस्तर पर राहत अभियान चलाया। चूरलमला का पुल बह जाने के बाद सेना ने कुछ ही घंटों में बेली ब्रिज बनाकर राहत कार्य को नई गति दी। हेलीकॉप्टर, नावों और भारी मशीनों की मदद से लोगों को सुरक्षित निकाला गया। कई स्वयंसेवी संगठनों ने भोजन, दवाइयां और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई। इस अभियान को देशभर में मानवीय एकजुटता की मिसाल माना गया।
हर बारिश के साथ लौट आता है डर
भूस्खलन से बचने वाले लोगों का कहना है कि तेज बारिश शुरू होते ही आज भी उनके मन में भय लौट आता है। हाल के महीनों में वायनाड क्षेत्र में हुई नई भूस्खलन घटनाओं ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। कई परिवार अब भी पहाड़ी इलाकों में रहने से डरते हैं। विशेषज्ञ लगातार संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और बेहतर आपदा प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। स्थानीय लोग सुरक्षित पुनर्वास और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
पुनर्वास पूरा करने की उठी मांग
पीड़ित परिवारों और स्थानीय संगठनों ने सरकार से शेष पात्र परिवारों को जल्द आवास उपलब्ध कराने की अपील की है। उनका कहना है कि पुनर्वास तभी पूरा माना जाएगा जब हर प्रभावित परिवार को सुरक्षित घर मिलेगा। साथ ही अंतिम लाभार्थी सूची जारी करने और लंबित मामलों का जल्द समाधान करने की मांग भी उठाई गई है। सरकार ने पुनर्वास कार्य तेज करने और शेष घर जल्द सौंपने का आश्वासन दिया है। दो साल बाद भी वायनाड के लोग नई जिंदगी की शुरुआत के साथ न्याय और सुरक्षा की उम्मीद लगाए हुए हैं।





