अहमदाबाद में ट्रैफिक पुलिस पर गंभीर आरोप: वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने महिला को मारा थप्पड़

वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिसकर्मी ने महिला को मारा थप्पड़

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गुजरात के अहमदाबाद से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी पर महिला के साथ कथित अभद्र व्यवहार और थप्पड़ मारने का आरोप लगा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे शहर में चर्चा तेज हो गई है और पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

वाहन चेकिंग के दौरान हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, घटना अहमदाबाद के पालडी इलाके के अंजली चौराहे के पास हुई। पीड़ित महिला बंसरी मनीष ठक्कर ने आरोप लगाया कि वह वाहन लेकर सिग्नल पार कर रही थीं, तभी ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ने उन्हें रोक लिया और लाइसेंस मांगा। महिला ने लाइसेंस दे दिया, लेकिन जब उन्होंने किनारे खड़े होने की बात कही तो पुलिसकर्मी नाराज हो गया।

आईडी कार्ड गिरने पर भड़का पुलिसकर्मी

महिला के अनुसार, पुलिस अधिकारी का आईडी कार्ड हाथ से नीचे गिर गया, जिसके बाद वह भड़क उठा और महिला को थप्पड़ मार दिया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी ने गाली-गलौज की और धमकी भी दी। इस पूरे घटनाक्रम ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

 

शिकायत दर्ज कराने में भी परेशानी

पीड़ित महिला का कहना है कि घटना के बाद उन्होंने 112 नंबर पर कॉल कर मदद मांगी, लेकिन समय पर सहायता नहीं मिली। इसके बाद जब वह पालडी थाने पहुंचीं तो एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया गया। देर रात तक थाने में बैठे रहने के बाद पुलिस ने केवल आवेदन लिया।

वायरल वीडियो के बाद बढ़ा दबाव

सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया। लोगों ने पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। कई यूजर्स ने कहा कि अगर कानून के रक्षक ही ऐसा व्यवहार करेंगे तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी।

जिग्नेश मेवाणी ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता जिग्नेश मेवाणी ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के दावे करने वाली सरकार इस मामले पर जवाब दे। उन्होंने आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की है।

पुलिस कमिश्नर ने लिया संज्ञान

अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर जीएस मलिक ने वायरल वीडियो और आरोपों पर संज्ञान लेते हुए मामले में जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब सबकी नजर प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई है।

कानून और जिम्मेदारी के बीच सवाल

यह घटना सिर्फ एक थप्पड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस संवेदनशील रेखा को उजागर करती है जहां अधिकारों के साथ जिम्मेदारी और व्यवहार की भी परीक्षा होती है। जनता अब जानना चाहती है कि क्या ऐसे मामलों में सख्ती से रोक लग पाएगी।

 

 

 

 

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