सी-सेक्शन के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी प्रभावित: एक वेंटिलेटर पर

एक वेंटिलेटर पर
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Pihu Agarwal

Pihu Agarwal

0 सेकंड पहले

Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Kunal Rao

Kunal Rao

0 सेकंड पहले

Aam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.

Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

10 मिनट पहले

Yeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.

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राजस्थान के बीकानेर स्थित पीबीएम (PBM) अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद छह प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने का गंभीर मामला सामने आया है। सभी महिलाओं को आईसीयू में भर्ती कर डायलिसिस पर रखा गया है, जबकि एक महिला की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और उसका इलाज वेंटिलेटर पर किया जा रहा है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब एक महीने पहले कोटा मेडिकल कॉलेज में सी-सेक्शन के बाद किडनी फेल होने से पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है।

 

20 से 27 वर्ष की महिलाओं की हालत बिगड़ी, डायलिसिस पर चल रहा इलाज
अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रभावित महिलाओं की उम्र 20 से 27 वर्ष के बीच है। सी-सेक्शन डिलीवरी के लगभग 10 से 15 दिन बाद इन महिलाओं में अचानक गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने लगीं। मरीजों में यूरिन रुकना, प्लेटलेट्स की संख्या में गिरावट, किडनी फेलियर और अन्य जटिल लक्षण पाए गए। सभी को तत्काल आईसीयू में शिफ्ट कर विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया है।

 

फलोदी की प्रीति की हालत गंभीर, वेंटिलेटर पर जारी उपचार
प्रभावित मरीजों में फलोदी निवासी 20 वर्षीय प्रीति की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बताई जा रही है। वह पहले से ही कई स्वास्थ्य जटिलताओं से जूझ रही थीं और फिलहाल वेंटिलेटर सपोर्ट पर उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

 

संक्रमण या अन्य कारण? विशेषज्ञ टीम कर रही गहन जांच
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सभी मामलों के पीछे संक्रमण जिम्मेदार है या कोई अन्य चिकित्सकीय कारण। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम संक्रमण, अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग), मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम (MODS) और अन्य संभावित कारणों की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

 

विशेष समिति गठित, उपचार प्रक्रिया की हो रही समीक्षा
पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. घीया ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ चिकित्सकों की एक विशेष समिति बनाई गई है। समिति प्रभावित मरीजों की चिकित्सा स्थिति, ऑपरेशन प्रक्रिया और उपचार संबंधी सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा कर रही है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि अधिकांश मरीजों की स्थिति फिलहाल स्थिर है।

 

अत्याधुनिक इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन लगाने की तैयारी
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने संभावित संक्रमण की समय रहते पहचान के लिए अत्याधुनिक इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि इस तकनीक के माध्यम से संक्रमण से जुड़े मामलों का शुरुआती स्तर पर पता लगाया जा सकेगा, जिससे भविष्य में ऐसी गंभीर परिस्थितियों को रोका जा सकेगा।

 

एसपी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य बोले- निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी
एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) के कई कारण हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना जांच रिपोर्ट के किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों की टीम सभी पहलुओं की वैज्ञानिक जांच कर रही है।

 

कोटा हादसे के बाद बढ़ी चिंता
बीकानेर का यह मामला कोटा मेडिकल कॉलेज में सामने आए उस चर्चित प्रकरण के बाद आया है, जिसमें सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से पांच प्रसूताओं की मौत हो गई थी। ऐसे में लगातार सामने आ रहे मामलों ने सरकारी अस्पतालों में प्रसूति सेवाओं और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Pihu Agarwal

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Jab tak samaj nahi jaagega, kuch nahi badlega.

Kunal Rao

Kunal Rao

0 सेकंड पहले

Aam aadmi ki taklif samjhna aur samajhana dono zaroori hai.

Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

10 मिनट पहले

Yeh sab dekh ke bahut dukh hota hai.

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