काशी के शहरी स्वरूप में बड़ा बदलाव: काशी में मीट-मांस और मछली की दुकानें होंगी शहर से बाहर

काशी में मीट-मांस और मछली की दुकानें होंगी शहर से बाहर
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Aditya Verma

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0 सेकंड पहले

Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

Kunal Rao

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0 सेकंड पहले

Aise logon ko support karna humara farz hai.

Navya Nair

Navya Nair

0 सेकंड पहले

Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

Arjun Singh

Arjun Singh

0 सेकंड पहले

Samaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.

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धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में मीट-मांस और मछली के कारोबार को लेकर वाराणसी नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। नगर निगम की साधारण सभा (सदन) की बैठक में शहर के भीतर संचालित मीट, मांस और मछली की दुकानों को चरणबद्ध तरीके से शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने पर सहमति बनी है। इस निर्णय का उद्देश्य काशी की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के साथ-साथ शहर को अधिक स्वच्छ और व्यवस्थित बनाना बताया गया है।

 

सदन की बैठक में मिली मंजूरी
मैदागिन स्थित टाउनहाल भवन में महापौर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में शहर के विकास, स्वच्छता, अतिक्रमण और जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार हुआ, जिसमें मीट-मांस और मछली के बाजारों को शहर के बाहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव प्रमुख रहा।

 

पहले चरण में पांच स्थान किए गए चिन्हित
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने जानकारी दी कि योजना के प्रथम चरण के लिए पांच स्थानों का चयन कर लिया गया है। इनमें रामनगर, सूजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर क्षेत्र शामिल हैं। ये सभी स्थान शहर की सीमा के निकट स्थित हैं, ताकि आम लोगों को खरीदारी में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

 

छह महीने में पूरी होगी प्रक्रिया
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि नगर निगम अगले छह महीनों के भीतर शहर के अंदर संचालित मीट-मांस और मछली की दुकानों को बाहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उन्होंने कहा कि काशी में प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, इसलिए शहर को उसकी धार्मिक गरिमा और सांस्कृतिक स्वरूप के अनुरूप बनाए रखना आवश्यक है।

 

पार्षद ने उठाया आजीविका का मुद्दा
बैठक के दौरान पार्षद गुलशन अली ने बताया कि लगभग एक वर्ष पहले भी इस प्रकार का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी कहा कि सावन माह के दौरान दुकानों के बंद रहने से इस कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित होती है। इस पर नगर आयुक्त ने आश्वासन दिया कि स्थानों का चयन पूरा हो चुका है और जल्द ही योजना को अमल में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

 

फैसले पर शुरू हुई बहस
नगर निगम के इस निर्णय के बाद शहर में चर्चा और बहस भी शुरू हो गई है। समर्थकों का मानना है कि इससे काशी की धार्मिक पहचान और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, जबकि कुछ लोग इसे व्यापार और रोजगार से जुड़े मुद्दों के नजरिए से भी देख रहे हैं। आने वाले समय में इस योजना के क्रियान्वयन और इसके प्रभावों पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

 

पर्यटन और स्वच्छता प्रबंधन को मिलेगा लाभ
नगर निगम का कहना है कि शहर की बढ़ती आबादी, श्रद्धालुओं की संख्या और पर्यटन गतिविधियों को देखते हुए यह कदम आवश्यक है। प्रशासन का मानना है कि निर्धारित स्थानों पर व्यवस्थित बाजार विकसित होने से स्वच्छता प्रबंधन बेहतर होगा और शहर के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों में भीड़ तथा अव्यवस्था कम करने में मदद मिलेगी।

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Aditya Verma

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Yeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.

Kunal Rao

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Aise logon ko support karna humara farz hai.

Navya Nair

Navya Nair

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Aam janta ka kya hoga? Koi nahi socha inke baare mein.

Arjun Singh

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Samaj ke liye is khabar ka bahut mahatva hai.

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