पंढरपुर की ओर बढ़ीं माउली-तुकाराम की पालखियां: लाखों वारकरी विट्ठल दर्शन को रवाना

लाखों वारकरी विट्ठल दर्शन को रवाना
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Sonu rai

Sonu rai

38 मिनट पहले

Spirituality hi asli shakti hai is duniya mein.

Monika Das

Monika Das

42 मिनट पहले

Spirituality hi asli shakti hai is duniya mein.

Pooja Reddy

Pooja Reddy

42 मिनट पहले

Graha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.

Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

5 घंटे पहले

Ishwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.

Arjun Singh

Arjun Singh

5 घंटे पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

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महाराष्ट्र का सबसे बड़ा सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्सव 'आषाढ़ी वारी 2026' अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। लाखों वारकरी "ज्ञानोबा-तुकाराम" के जयघोष, टाळ-मृदंग और भगवा ध्वज के साथ भगवान विट्ठल के दर्शन के लिए पंढरपुर की ओर बढ़ रहे हैं। संत ज्ञानेश्वर महाराज और संत तुकाराम महाराज की पालखियों ने पुणे का पारंपरिक प्रवास पूरा कर आगे की यात्रा शुरू कर दी है।


700 वर्षों से जीवित है भक्ति की परंपरा
वारकरी संप्रदाय की यह परंपरा 700 से अधिक वर्षों से निरंतर चली आ रही है। श्रद्धालु बिना किसी आधुनिक वाहन के लगभग 250 से 300 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करते हैं। यात्रा के दौरान अभंग, कीर्तन, भजन और सामूहिक सेवा की परंपरा इस वारी को केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बनाती है।


दिवे घाट पार कर आगे बढ़ीं पालखियां
संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालखी ने लाखों श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध दिवे घाट सफलतापूर्वक पार कर सासवड की ओर प्रस्थान किया। वहीं संत तुकाराम महाराज की पालखी लोणी काळभोर होते हुए यवत की दिशा में बढ़ रही है। मार्ग में विभिन्न गांवों में श्रद्धालु पालखियों का पुष्पवर्षा, आरती और भव्य स्वागत कर रहे हैं।

 

 बारिश भी नहीं रोक सकी श्रद्धालुओं का उत्साह
इस वर्ष मानसून की तेज बारिश और इंद्रायणी नदी के उफान के बावजूद वारकरियों का उत्साह कम नहीं हुआ। प्रशासन द्वारा सुरक्षा संबंधी सतर्कता बरती गई, लेकिन लाखों श्रद्धालुओं ने परंपरा को निभाते हुए यात्रा जारी रखी। कठिन मौसम के बावजूद वारी पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ आगे बढ़ रही है।


25 जुलाई को आषाढ़ी एकादशी की महापूजा
करीब 21 दिनों की पैदल यात्रा के बाद पालखियां 24 जुलाई 2026 को पंढरपुर पहुंचेंगी। इसके अगले दिन 25 जुलाई को आषाढ़ी (देवशयनी) एकादशी के अवसर पर भगवान विट्ठल की पारंपरिक शासकीय महापूजा होगी। इसी दिन से हिंदू धर्म में चातुर्मास का शुभारंभ माना जाता है, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं।


AI, ड्रोन और विशेष सुरक्षा व्यवस्था
लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस वर्ष व्यापक इंतजाम किए हैं। पहली बार AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट, ड्रोन कैमरों से निगरानी, चिकित्सा शिविर, पेयजल केंद्र और आपातकालीन सहायता दल तैनात किए गए हैं। साथ ही 'स्वच्छ पंढरपुर, आनंदी वारी' अभियान के माध्यम से चंद्रभागा नदी और पूरे तीर्थ क्षेत्र को स्वच्छ रखने का विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।

 

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Sonu rai

Sonu rai

38 मिनट पहले

Spirituality hi asli shakti hai is duniya mein.

Monika Das

Monika Das

42 मिनट पहले

Spirituality hi asli shakti hai is duniya mein.

Pooja Reddy

Pooja Reddy

42 मिनट पहले

Graha nakshatra sab kuch pehle se bata dete hain.

Ishaan Tiwari

Ishaan Tiwari

5 घंटे पहले

Ishwar ki leela ko koi nahi samjha sakta.

Arjun Singh

Arjun Singh

5 घंटे पहले

Rishiyon ne sadi pehle hi inka jikr kiya tha.

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