Kedartal Trek Tragedy: वर्तिका और दीपिका के शव आज पहुंचेंगे लखनऊ

Riya Jain
0 सेकंड पहलेTeam India Zindabad! Aage badhte raho.
Anil Sen
0 सेकंड पहलेHamare khiladi ne kamaal kar diya, garv hai!
Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेChampion ban ke dikhao, hum saath hain!
केदारताल ट्रेक हादसे में दो बहनों की मौत
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रेक पर भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की चपेट में आने से लखनऊ की दो सगी बहनों वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा की मौत हो गई। बुधवार सुबह उत्तरकाशी में चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दोनों के शव बरामद हुए। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शवों को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं।
आज लखनऊ पहुंचेगा दोनों बहनों का पार्थिव शरीर
परिजनों के अनुसार, दोनों बहनों के शव गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे लखनऊ के गायत्रीपुरम स्थित घर पहुंचेंगे। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। हादसे में लापता हुए 8 ट्रेकर्स में से अब तक 6 के शव बरामद किए जा चुके हैं।
27 अक्टूबर को ट्रेकिंग के लिए निकली थीं बहनें
वर्तिका और दीपिका 27 अक्टूबर को 7 अन्य ट्रेकर्स और 5 सपोर्ट स्टाफ के साथ गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुई थीं। इस दल को तीन दिन का ट्रेक पूरा कर 29 अक्टूबर को वापस लौटना था। इसी दौरान उत्तरकाशी के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम अचानक खराब हो गया। भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण वापसी के रास्ते बंद हो गए और दल के सदस्य फंस गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में बरामद हुए शव
30 अक्टूबर को कच्ची ढांग के पास फंसे दल के सदस्यों ने ट्रेकिंग एजेंसी से मदद मांगी थी, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। 31 अक्टूबर को चार सपोर्ट स्टाफ को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद बुधवार को दोनों बहनों समेत तीन और ट्रेकर्स के शव बरामद किए गए।
पहाड़ों पर ट्रेकिंग का शौक रखती थीं दोनों बहनें
वर्तिका और दीपिका के पिता श्रीनारायण वर्मा कृषि विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। परिवार मूल रूप से बाराबंकी के सराय पांडेय का रहने वाला है। वर्तिका नोएडा की एक निजी कंपनी में काम करती थीं और फ्रीलांस इन्फ्लुएंसर भी थीं। उन्हें कंपनी की ओर से मिले टूर पैकेज के तहत केदारताल ट्रेक पर जाने का मौका मिला था। वहीं, दीपिका मुंबई की एक कंपनी में ग्राफिक्स डिजाइनर थीं और फिलहाल वर्क फ्रॉम होम के कारण लखनऊ में रह रही थीं।
कई कठिन ट्रेक पूरे कर चुकी थीं बहनें
दोनों बहनों को पहाड़ों पर ट्रेकिंग का गहरा शौक था। वे भारत और नेपाल के कई कठिन ट्रेक पूरे कर चुकी थीं। हादसे से करीब दो महीने पहले ही वे फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौटी थीं।
ट्रेकिंग एजेंसी पर लापरवाही के आरोप
वर्तिका और दीपिका के भाई अतुल वर्मा ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद भी ट्रेकिंग एजेंसी ने परिवार को कोई जानकारी नहीं दी। भाई और अन्य परिजनों को दुर्घटना की खबर सोशल मीडिया के जरिए मिली, जिसके बाद वे तुरंत उत्तरकाशी पहुंचे।
मौसम अलर्ट के बावजूद ट्रेक की अनुमति पर सवाल
परिजनों ने ट्रेकिंग एजेंसी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मौसम विभाग के अलर्ट और खराब मौसम के बावजूद जोखिम भरे केदारताल ट्रेक पर जाने की अनुमति क्यों दी गई। परिवार का कहना है कि यदि उन्हें समय पर सूचना मिल जाती, तो बचाव अभियान के लिए तुरंत मदद जुटाने के प्रयास किए जा सकते थे।








