Meta पर $1.4 ट्रिलियन जुर्माने की मांग: अमेरिका के चार राज्यों ने Meta को कोर्ट में घेरा

Dev Kapoor
3 दिन पहलेYeh app/gadget sach mein game changer sabit hoga.
Aarav Sharma
3 दिन पहलेYeh innovation aam logon ke bahut kaam aayega.
Ananya Sharma
3 दिन पहलेIs research se bahut logon ko faayda hoga.
Saanvi Pandey
3 दिन पहलेTechnology ki yeh khabar future badal sakti hai!
अमेरिका के कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी राज्यों ने फेडरल कोर्ट में दायर दस्तावेजों के जरिए Meta Platforms पर 1.4 ट्रिलियन डॉलर (लगभग लाखों करोड़ रुपये) के जुर्माने की मांग की है। यह मामला Facebook और Instagram के बच्चों व किशोरों पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़ा है। इस मामले की सुनवाई का ट्रायल अगस्त 2026 में शुरू होने की संभावना है।
बच्चों को सोशल मीडिया का आदी बनाने का आरोप
चारों राज्यों का आरोप है कि Meta ने Facebook और Instagram में एंडलेस स्क्रॉलिंग, लगातार नोटिफिकेशन और अन्य एंगेजमेंट फीचर्स इस तरह तैयार किए कि बच्चे और युवा लंबे समय तक प्लेटफॉर्म से जुड़े रहें। उनका दावा है कि कंपनी ने जानबूझकर ऐसे डिज़ाइन अपनाए, जिससे उपयोगकर्ताओं में सोशल मीडिया की लत बढ़े और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़े।
सुरक्षा को लेकर जनता को गुमराह करने का दावा
राज्यों का कहना है कि Meta ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर अपने प्लेटफॉर्म के प्रभाव को लेकर जनता और अभिभावकों के सामने भ्रामक दावे किए। आरोप है कि कंपनी को संभावित जोखिमों की जानकारी होने के बावजूद उसने उन्हें पर्याप्त रूप से सार्वजनिक नहीं किया और अपने उत्पादों को सुरक्षित बताती रही।
कैसे तय हुई $1.4 ट्रिलियन की मांग?
इतनी बड़ी जुर्माने की राशि राज्यों के उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के आधार पर तय की गई है। अधिकारियों ने कथित उल्लंघनों की अनुमानित संख्या को प्रत्येक उल्लंघन पर लागू अधिकतम कानूनी जुर्माने से गुणा कर यह आंकड़ा तैयार किया है। यह राशि Meta की मौजूदा बाजार पूंजी (Market Value) के करीब मानी जा रही है।
Meta ने आरोपों को बताया निराधार
Meta ने अदालत में इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि राज्यों के दावे पूरी तरह "आधारहीन" हैं। कंपनी का कहना है कि उपभोक्ता संरक्षण कानूनों के इतिहास में इतनी बड़ी पेनल्टी का कोई उदाहरण नहीं है। Meta ने यह भी तर्क दिया कि "सोशल मीडिया एडिक्शन" को अभी तक सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त मानसिक बीमारी नहीं माना गया है।
फैसले पर टिकी टेक इंडस्ट्री की नजर
इस मामले को दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी मामलों में माना जा रहा है। यदि अदालत राज्यों के पक्ष में फैसला देती है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की डिजाइन, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर नए और सख्त नियम लागू होने की संभावना बढ़ सकती है।








