राजस्थान हाईकोर्ट से आसाराम को बड़ी राहत: आसाराम को 20 दिन की पैरोल मंजूर

Harsh Pandya
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Simran Arora
0 सेकंड पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Simran Arora
0 सेकंड पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Kabir Shukla
0 सेकंड पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Vihaan Patel
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Sai Mehta
0 सेकंड पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम (87) को 20 दिनों की नियमित पैरोल देने का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से जताई गई आपत्तियों को पर्याप्त आधारहीन मानते हुए राहत प्रदान की। जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद आसाराम को निर्धारित शर्तों के पालन के बाद रिहा किए जाने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने लंबी कैद और पूर्व रिकॉर्ड को माना महत्वपूर्ण
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने कहा कि आसाराम पिछले 13 वर्ष, 1 महीना और 24 दिन से जेल में बंद है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में मिली अंतरिम रिहाई और चिकित्सकीय राहत के दौरान उसने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया तथा न तो फरार होने का प्रयास किया और न ही किसी गवाह को प्रभावित करने की कोई शिकायत सामने आई।
सरकार और पुलिस की आपत्तियां अदालत ने नहीं मानी
राज्य सरकार और जिला मजिस्ट्रेट समिति ने पैरोल याचिका का विरोध करते हुए आशंका जताई थी कि रिहाई से पीड़िता के परिवार की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है तथा आसाराम के खिलाफ अन्य राज्यों में भी मामले लंबित हैं। अदालत ने कहा कि अन्य राज्यों के मामलों का निस्तारण वहां के कानूनों के अनुसार होगा और केवल इन आधारों पर राजस्थान के पैरोल नियमों के तहत मिलने वाले अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
पैरोल के लिए तय की गईं सख्त शर्तें
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि आसाराम को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके के साथ 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें प्रस्तुत करनी होंगी। इन औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद ही नियमित पैरोल का लाभ मिलेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि पैरोल अवधि के दौरान सभी निर्धारित नियमों और शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगी रिहाई
अदालत से पैरोल की मंजूरी मिलने के बावजूद तत्काल रिहाई नहीं हो सकी। अधिवक्ता के अनुसार, जेल प्रशासन की आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद जेल प्रशासन अंतिम आदेश लागू करेगा।
मामला फिर चर्चा में, कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। अदालत ने अपने निर्णय में पैरोल के कानूनी प्रावधानों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर राहत दी है। वहीं राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां आगे की कानूनी प्रक्रिया और आदेश के पालन पर नजर बनाए हुए हैं। यह आदेश पैरोल के अधिकार और उसके कानूनी मानकों को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







