35 साल बाद सरला भट्ट हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई: यासीन मलिक समेत 5 आतंकियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

Neel Saxena
0 सेकंड पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Ritika Ghosh
1 घंटे पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Ananya Sharma
1 घंटे पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
जम्मू-कश्मीर के वर्ष 1990 के चर्चित सरला भट्ट अपहरण एवं हत्या मामले में 35 वर्ष बाद जांच ने महत्वपूर्ण मोड़ लिया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने श्रीनगर की विशेष अदालत में 737 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया है। एजेंसी ने अपनी जांच में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के तत्कालीन कमांडर मोहम्मद यासीन मलिक सहित पांच आतंकियों की संलिप्तता का दावा किया है। यह मामला कश्मीर में आतंकवाद के शुरुआती दौर के सबसे चर्चित और जघन्य मामलों में गिना जाता है।
इन पांच आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुआ आरोपपत्र
एसआईए के अनुसार आरोपपत्र में मोहम्मद यासीन मलिक, खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू तथा मोहम्मद यूसुफ उर्फ इदरीस को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक इनमें से अब्दुल हमीद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ की मृत्यु हो चुकी है, जबकि खुर्शीद अहमद चाल्कू के पाकिस्तान भाग जाने का दावा किया गया है। यासीन मलिक फिलहाल एक अन्य आतंकी वित्तपोषण मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं और तिहाड़ जेल में बंद हैं।
क्या था सरला भट्ट हत्याकांड?
एसकेआईएमएस (Sher-i-Kashmir Institute of Medical Sciences) में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत सरला भट्ट का 18 अप्रैल 1990 को श्रीनगर स्थित अस्पताल के पास से अपहरण कर लिया गया था। एसआईए के आरोपपत्र के अनुसार, उन्हें बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया और बाद में श्रीनगर के मालबाग क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनका शव 19 अप्रैल 1990 को बरामद हुआ था। जांच एजेंसी का कहना है कि यह घटना उस समय कश्मीरी पंडित समुदाय में भय का माहौल बनाने की सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा थी। यौन उत्पीड़न से जुड़े दावों का भी विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में उल्लेख है, जिनकी पुष्टि न्यायालय द्वारा अभी शेष है।
2024 में एसआईए को सौंपी गई थी जांच
दशकों तक आतंकवाद, गवाहों के सामने न आने और सीमित साक्ष्यों के कारण यह मामला लंबे समय तक अनसुलझा रहा। 18 मार्च 2024 को जम्मू-कश्मीर पुलिस महानिदेशक के आदेश पर इसकी जांच एसआईए को सौंपी गई। एजेंसी ने सुरक्षित गवाहों के बयान, प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, फोरेंसिक एवं बैलिस्टिक रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, दस्तावेजी साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और विस्तृत फील्ड जांच के आधार पर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण किया, जिसके बाद 737 पन्नों का आरोपपत्र तैयार किया गया।
आरोपपत्र में क्या दावा किया गया है?
एसआईए ने आरोपपत्र में दावा किया है कि सरला भट्ट को मुखबिर बताए जाने का आरोप जांच में सही नहीं पाया गया। एजेंसी के अनुसार, यह कथित तौर पर हत्या को उचित ठहराने के लिए गढ़ी गई कहानी थी। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्य इस ओर संकेत करते हैं कि यह अपराध एक सुनियोजित आतंकी साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य कश्मीरी पंडित समुदाय में भय फैलाना था।
न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
सरला भट्ट हत्याकांड में चार्जशीट दाखिल होना 1989-90 के दौरान कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुई हिंसा और लक्षित हत्याओं से जुड़े मामलों में न्याय की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। वर्षों से विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय इन मामलों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करता रहा है। हालांकि अंतिम निर्णय अब अदालत की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।







