Crude Oil Rises: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ा दबाव

Pranav Srivastava
2 घंटे पहलेCrypto mein invest karne se pehle aisi khabarein padhni chahiye.
Pihu Agarwal
3 घंटे पहलेYeh decision business community ko buri tarah affect karega.
Ananya Sharma
4 घंटे पहलेMarket mein itna uthar-chadhaav, investors pareshan hain.
Krishna Yadav
4 घंटे पहलेBusiness world mein yeh ek badi halachal hai.
Vivaan Gupta
6 घंटे पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
Sonu rai
7 घंटे पहलेMarket mein itna uthar-chadhaav, investors pareshan hain.
Sneha Menon
8 घंटे पहलेChhote vyapariyon ko bahut nuksan hoga isse.
Sneha Menon
10 घंटे पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
कच्चा तेल 100 डॉलर के पार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। 24 सितंबर की सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 102.47 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI करीब 91.68 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे एक दिन पहले ब्रेंट 103.08 डॉलर और WTI 92.08 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था।
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम फिलहाल स्थिर हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, घरेलू ईंधन कीमतों में पिछला बदलाव मई 2026 में हुआ था और उसके बाद से खुदरा दरों में वृद्धि नहीं की गई है।
तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और घरेलू ईंधन दरों में बदलाव नहीं होने से सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। ICRA के अनुमान के मुताबिक पेट्रोल पर करीब ₹8 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹9 प्रति लीटर का नकारात्मक मार्केटिंग मार्जिन है। तीन प्रमुख सरकारी OMCs का संयुक्त दैनिक नुकसान करीब ₹530 करोड़ आंका गया है।
महंगे कच्चे तेल का असर
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से दुनिया के कई बाजारों में ईंधन कीमतों पर असर पड़ा है। भारत में घरेलू पेट्रोल-डीजल दरें अभी स्थिर रहने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार की तेजी का पूरा असर सीधे उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है। हालांकि, लंबे समय तक ऊंची कीमतें बनी रहने पर तेल कंपनियों की लागत और मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम
कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने से घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड की कीमत के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि भारत में पेट्रोल और डीजल तुरंत महंगे होंगे। घरेलू खुदरा कीमतें तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण, अंतरराष्ट्रीय उत्पाद कीमतों और अन्य बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं।
24 सितंबर के रेट पर नजर
24 सितंबर 2026 को देश के कई हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें पिछले स्तरों के आसपास बनी हुई हैं। किसी शहर में वास्तविक कीमत जानने के लिए संबंधित तेल कंपनी की उसी दिन की आधिकारिक अपडेटेड दर को अंतिम माना जाना चाहिए।








