CEC Gyanesh Kumar Impeachment Move: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी

Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Reyansh Joshi
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Payal jadon
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Sai Mehta
0 सेकंड पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Monika Das
3 मिनट पहलेIs niti se desh ka bhala hoga ya nahi — debate honi chahiye.
Taushif Shekh
57 मिनट पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर INDIA ब्लॉक एक बार फिर संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। 24 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक विपक्षी दल लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में नोटिस देने की तैयारी में हैं। प्रस्ताव का नया ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और इसे कानूनी विशेषज्ञों की सलाह से अंतिम रूप दिए जाने की बात कही गई है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार नोटिस अगले सप्ताह तक संसद में पेश किया जा सकता है। फिलहाल यह पूरी प्रक्रिया तैयारी के स्तर पर है और इसे ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का फैसला नहीं माना जा सकता।
नए प्रस्ताव के लिए जुटाए जा रहे हस्ताक्षर
रिपोर्टों के अनुसार प्रस्ताव के ड्राफ्ट को विपक्षी सांसदों के बीच साझा किया जा रहा है और आवश्यक समर्थन जुटाने की प्रक्रिया चल रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को संसद में स्वीकार कराने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। INDIA ब्लॉक की ओर से दोनों सदनों में नोटिस देने की तैयारी इसी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है। प्रस्ताव में किन आरोपों को शामिल किया जाएगा, इसे लेकर भी कानूनी विशेषज्ञों के साथ चर्चा की जा रही है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रस्ताव निश्चित रूप से संसद में स्वीकार हो जाएगा।
पहले भी दिए जा चुके हैं नोटिस
ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष इससे पहले भी संसद में नोटिस दे चुका है। रिपोर्टों के अनुसार 12 मार्च 2026 को एक नोटिस दिया गया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद 24 अप्रैल 2026 को विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों की ओर से एक और नोटिस दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस नोटिस को लेकर विपक्ष का कहना है कि वह अभी लंबित है और उसे खारिज नहीं किया गया है। अब विपक्ष नए सिरे से दोनों सदनों में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को पुराने प्रयासों से जुड़ी आगे की राजनीतिक और संसदीय कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है।
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विवाद
नए महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी ऐसे समय में हो रही है जब चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों, खासकर मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। विपक्ष इन्हीं घटनाक्रमों को आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के आधार के तौर पर सामने रख रहा है। हालांकि इन आपत्तियों की राजनीतिक व्याख्या और विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप अलग विषय हैं, इसलिए उन्हें स्थापित तथ्य के बजाय संबंधित नेताओं और दलों के दावों के रूप में रिपोर्ट करना जरूरी है।
चुनाव आयोग ने विवाद पर क्या कहा
दूसरी ओर चुनाव आयोग ने आयोग के भीतर मतभेद को लेकर सामने आई खबरों पर अपना पक्ष रखा है। आयोग की ओर से कहा गया है कि अलग-अलग अधिकारियों या आयुक्तों की ओर से सुझाव या टिप्पणियां देना अपने आप में संस्थागत टकराव का प्रमाण नहीं है। आयोग ने यह भी कहा कि उसके कामकाज में बड़ी संख्या में फैसले, मंजूरियां और निर्देश नियमित प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों को सामने रखकर पूरी तस्वीर नहीं देखी जानी चाहिए। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी आयोग ने संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों की निर्धारित भूमिका का उल्लेख किया है। ऐसे में मौजूदा विवाद में विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग के जवाब—दोनों को अलग-अलग दर्ज करना जरूरी है।
CEC को हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं
मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया सामान्य राजनीतिक प्रस्ताव से अलग और कठिन है। संविधान के तहत CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन आधारों और प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। प्रस्ताव के लिए संबंधित सदन में निर्धारित संख्या में सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं और इसके बाद प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने तथा आरोपों की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। जांच और संसदीय प्रक्रिया के कई चरण पूरे होने के बाद ही अंतिम निर्णय की स्थिति आती है। इसलिए वर्तमान में INDIA ब्लॉक द्वारा की जा रही तैयारी को केवल महाभियोग प्रस्ताव लाने की कवायद के रूप में देखना सही है। 24 सितंबर 2026 तक ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का कोई अंतिम संसदीय फैसला नहीं हुआ है।








