Onion Prices Fall: प्याज के थोक भाव में 20% तक गिरावट

Ravi sinha
0 सेकंड पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
Neel Saxena
0 सेकंड पहलेChhote vyapariyon ko bahut nuksan hoga isse.
Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेEconomy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.
Pooja Reddy
0 सेकंड पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
Pihu Agarwal
1 मिनट पहलेMarket mein itna uthar-chadhaav, investors pareshan hain.
Payal jadon
53 मिनट पहलेChhote vyapariyon ko bahut nuksan hoga isse.
नई फसल की आवक से प्याज के थोक भाव में गिरावट
देश की प्याज मंडियों में कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से नई फसल की आवक बढ़ने के कारण पिछले दस दिनों में प्याज के थोक भाव में करीब 20 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश से भी खरीफ प्याज की आपूर्ति बढ़ने से बाजार में उपलब्धता बेहतर हुई है। आने वाले दिनों में नासिक और अलवर से नई फसल की आवक बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। हालांकि, खुदरा बाजार में ग्राहकों को इस गिरावट का पूरा लाभ अभी नहीं मिला है।
लासलगांव मंडी में कितने हुए प्याज के भाव?
महाराष्ट्र की प्रमुख लासलगांव प्याज मंडी में 1 अक्टूबर को प्याज का भाव 4,450 रुपये प्रति क्विंटल था। रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर तक यह घटकर 3,700 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे पहुंच गया। थोक बाजार में आई इस गिरावट से संकेत मिलता है कि नई फसल की आवक का असर कीमतों पर पड़ने लगा है। आने वाले सप्ताहों में बाजार का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि मंडियों तक नई फसल कितनी तेजी से पहुंचती है और आपूर्ति बढ़ने का लाभ खुदरा ग्राहकों तक कितनी जल्दी पहुंचता है।
खुदरा बाजार में अब भी महंगा प्याज
थोक भाव में गिरावट के बावजूद खुदरा बाजार में प्याज की कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई जगह प्याज 70 रुपये प्रति किलो से अधिक कीमत पर बिक रहा है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के 126 शहरों में पिछले दो सप्ताह के दौरान खुदरा कीमतों में प्रति किलो 1 से 21 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अलग-अलग शहरों में कीमतों में राहत की मात्रा अलग-अलग है। ऐसे में थोक बाजार में आई गिरावट का असर ग्राहकों की जेब पर पूरी तरह दिखने में समय लग सकता है।
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश से बढ़ी आपूर्ति
प्याज की कीमतों में गिरावट की प्रमुख वजह इन राज्यों से खरीफ प्याज की बढ़ती आवक बताई जा रही है। नई फसल उपलब्ध होने से उत्तर भारत के खरीदारों की महाराष्ट्र के पुराने प्याज पर निर्भरता कम हुई है। साथ ही, निर्यातकों की ओर से नई फसल को प्राथमिकता दिए जाने से मार्च-अप्रैल में काटकर भंडारित किए गए प्याज की मांग पर दबाव पड़ा है। राजस्थान से भी अक्टूबर के अंत तक नई फसल आने की उम्मीद है, जबकि महाराष्ट्र में नवंबर से कटाई शुरू होने की संभावना जताई गई है। इन कारणों से बाजार में आपूर्ति और कीमतों की स्थिति आगे बदल सकती है।
सरकार ने बफर स्टॉक से बढ़ाई प्याज की आपूर्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज निकालकर बड़े शहरों में आपूर्ति बढ़ाई है। आठ कांदा एक्सप्रेस और 467 ट्रकों के माध्यम से दो लाख क्विंटल से अधिक प्याज बाजार तक पहुंचाने की जानकारी दी गई है। अधिक खपत वाले केंद्रों में आपूर्ति मजबूत करने के लिए अतिरिक्त रेल रैक चलाने की भी योजना है। सरकारी भंडार से प्याज उपलब्ध कराने का उद्देश्य बाजार में आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करना है।
आगे प्याज की कीमतों का रुख क्या रहेगा?
आने वाले दिनों में प्याज की कीमतें मुख्य रूप से नई फसल की आवक, मांग और वितरण व्यवस्था पर निर्भर करेंगी। बाजार में आपूर्ति बढ़ने से ग्राहकों को राहत मिलने की संभावना है, लेकिन थोक कीमतों में गिरावट का पूरा लाभ खुदरा बाजार तक पहुंचना जरूरी है। वहीं, नई फसल आने के समय भंडारित प्याज की अधिक बिक्री से किसानों को मिलने वाले भाव पर भी दबाव पड़ सकता है। इसलिए कीमतों में स्थायी राहत के लिए बाजार में संतुलित आपूर्ति और किसानों तथा उपभोक्ताओं दोनों के हितों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होगा।








