Diesel Buying Cap: डीजल खरीद पर लग सकती है लिमिट, कंपनियां कर रहीं तैयारी

Sai Mehta
0 सेकंड पहलेRBI aur government ko milkar iska hal nikalna chahiye.
Diya Gupta
9 मिनट पहलेPaise ka khel bahut risk bhara ho gaya hai, sambhal ke chalo.
Sai Mehta
2 घंटे पहलेYeh decision business community ko buri tarah affect karega.
Pihu Agarwal
2 घंटे पहलेMarket mein itna uthar-chadhaav, investors pareshan hain.
Shruti Bajpai
4 घंटे पहलेBusiness world mein yeh ek badi halachal hai.
Aarav Sharma
5 घंटे पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
Sneha Menon
6 घंटे पहलेCrypto mein invest karne se pehle aisi khabarein padhni chahiye.
डीजल खरीद पर लग सकती है लिमिट
देश में पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदने की मात्रा पर आने वाले दिनों में लिमिट लग सकती है। जियो-बीपी और नायरा एनर्जी ने कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री की मात्रा सीमित कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जियो-बीपी के पंपों पर एक ग्राहक को रोजाना अधिकतम 50 लीटर डीजल देने की सीमा तय की गई है, जबकि नायरा एनर्जी के अलग-अलग पंपों पर यह सीमा 70 से 200 लीटर तक हो सकती है। इसके बाद इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां भी डीजल बिक्री पर मात्रा की सीमा लगाने पर विचार कर सकती हैं।
डीजल की कीमतों में बड़ा अंतर
पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले डीजल और बल्क ग्राहकों को मिलने वाले डीजल की कीमत में बड़ा अंतर आने के बाद यह स्थिति बनी है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल पंपों पर डीजल की कीमत मई से स्थिर रही, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। दूसरी ओर, बल्क ग्राहकों के लिए डीजल की कीमत में तेजी से बदलाव हुआ और दोनों कीमतों के बीच अंतर करीब 40 रुपये प्रति लीटर तक बताया गया। इस वजह से फैक्ट्रियां, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, टेलीकॉम कंपनियां, होटल, मॉल, डेटा सेंटर और अस्पताल जैसे बड़े ग्राहक पेट्रोल पंपों से सस्ता डीजल खरीदने लगे। कुछ मामलों में 400 से 600 लीटर तक डीजल खरीदने की जानकारी सामने आई है, जिससे पेट्रोल पंपों के स्टॉक पर दबाव बढ़ सकता है।
बड़े ग्राहकों की खरीद से स्टॉक पर दबाव
बड़े ग्राहकों द्वारा ज्यादा मात्रा में डीजल खरीदने से पेट्रोल पंपों का स्टॉक तेजी से कम हो सकता है, जबकि नया स्टॉक पहुंचने में समय लगता है। इसी वजह से जियो-बीपी और नायरा एनर्जी ने बिक्री की मात्रा को नियंत्रित करना शुरू किया है। कंपनियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त डीजल उपलब्ध रखना और सामान्य वाहन मालिकों के लिए फ्यूल की उपलब्धता बनाए रखना है। देश में करीब 1.04 लाख पेट्रोल पंप हैं। इनमें इंडियन ऑयल के करीब 43,289, बीपीसीएल के करीब 25,587 और एचपीसीएल के करीब 25,238 आउटलेट बताए जाते हैं। वहीं जियो-बीपी के करीब 2,227 और नायरा एनर्जी के करीब 7,105 आउटलेट हैं।
सरकारी कंपनियां भी लगा सकती हैं कैप
अगर रिटेल और बल्क डीजल की कीमतों के बीच अंतर आगे भी बना रहता है और बड़े ग्राहक पेट्रोल पंपों से खरीद जारी रखते हैं, तो सरकारी तेल कंपनियां भी बिक्री की मात्रा सीमित कर सकती हैं। जियो-बीपी ने कहा है कि उसके मोबिलिटी स्टेशन चालू हैं और वहां पर्याप्त फ्यूल स्टॉक मौजूद है। कंपनी के अनुसार, बढ़ी हुई मांग को देखते हुए फ्यूल की उपलब्धता को मैनेज करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, खासकर इंडस्ट्रियल और नॉन-ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल के लिए बढ़ी मांग को ध्यान में रखते हुए।
आम ग्राहकों पर क्या असर होगा
फिलहाल ऐसी लिमिट मुख्य रूप से ज्यादा मात्रा में डीजल खरीदने वाले ग्राहकों को प्रभावित कर सकती है। सामान्य वाहन मालिकों की रोजमर्रा की डीजल जरूरत आमतौर पर इन सीमाओं से काफी कम होती है, इसलिए उन पर सीधा असर सीमित रहने की संभावना है। हालांकि, यदि बड़े ग्राहक लगातार पेट्रोल पंपों से डीजल खरीदते रहे तो कंपनियां बिक्री की मात्रा पर और सख्त नियम लागू कर सकती हैं। इसका उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर डीजल का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना और सामान्य ग्राहकों के लिए फ्यूल की उपलब्धता सुनिश्चित करना होगा।








