Delhi Police ने तोड़ा साइबर ठगों का जाल — : पैन इंडिया साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़, 5 करोड़ की क्रिप्टो मनी ट्रेल पकड़ी

पैन इंडिया साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़, 5 करोड़ की क्रिप्टो मनी ट्रेल पकड़ी

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भारत में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर लगातार हो रही कार्रवाई के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक ऐसे साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जो डिजिटल अरेस्ट, फर्जी इन्वेस्टमेंट योजनाओं और म्यूल अकाउंट्स के जरिए लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहा था। 
जांच में खुलासा हुआ है कि यह सिंडिकेट न केवल परंपरागत बैंकिंग फ्रॉड कर रहा था, बल्कि अपने नेटवर्क को छिपाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का बड़े पैमाने पर उपयोग भी कर रहा था। पुलिस ने तीन प्रमुख क्रिप्टो वॉलेट्स से लगभग 5 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की पहचान की है, जिनका संबंध विदेशों में बैठे ऑपरेटरों से जुड़ता पाया गया।

कैसे चलता था ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खेल?
सिर्फ 24 घंटे में दोगुना रिटर्न” का वादा
साइबर धोखेबाज सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए विज्ञापन चलाते थे, जहां पीड़ितों को एक आकर्षक इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर जोड़ दिया जाता था।
शुरुआत में नकली पोर्टल पर कुछ कमाई दिखाकर विश्वास जमाया जाता था, जिसके बाद पीड़ित लाखों रुपये निवेश कर देते।
जैसे ही रकम बड़ी होती, प्लेटफॉर्म अचानक फ्रीज हो जाता और पीड़ित का अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता।

इस रैकेट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था—म्यूल अकाउंट्स।
गिरोह ने देशभर के कई युवाओं, बेरोजगारों और फ्रीलांसरों को कमिशन के बदले बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया।

इन खातों के माध्यम से:
विभिन्न पीड़ितों से पैसे मंगाए जाते,
कुछ ही घंटों में रकम कई खातों में घुमाई जाती,
और अंत में पैसे को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशी वॉलेट्स में भेज दिया जाता।
एजेंसियों के अनुसार, अभी तक 5 करोड़ रुपये से अधिक के क्रिप्टो लेनदेन की पुष्टि हो चुकी है।

प्रारंभिक जांच संकेत देती है कि यह गिरोह चीन, दुबई और सिंगापुर स्थित नेटवर्क से भी जुड़ा हो सकता है।
कई डिजिटल वॉलेट और ट्रांजैक्शन ऐसे हैं जिनकी लोकेशन भारत से बाहर की है।
एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा संगठनों से जानकारी जुटा रही हैं।

पुलिस ने अब तक कई मनी म्यूल, टेक ऑपरेटर, और कॉलिंग एजेंट को गिरफ्तार किया है।
साथ ही: मोबाइल फोन, लैपटॉप, फर्जी सिम, डिजिटल वॉलेट डिटेल, स्क्रिप्ट्स और कॉलिंग डेटा को जब्त किया गया है।

जांच अधिकारी का कहना है कि यह गिरोह अत्यधिक संगठित था और इसके कई मॉड्यूल अभी भी सक्रिय हो सकते हैं।
विशेषज्ञों ने नागरिकों को चेतावनी देते हुए कहा:
कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती।
बैंक, पुलिस, CBI, RBI कभी भी OTP या अकाउंट एक्सेस नहीं मांगते।
किसी भी ऐप या वेबसाइट में निवेश से पहले उसकी कंपनी, रजिस्ट्री और लाइसेंस की जांच अनिवार्य है।
अनजान लिंक या ऐप डाउनलोड करने से बचें।

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