Cyber security: RBI ने बढ़ाई बैंकिंग सुरक्षा

Neha Tripathi
0 सेकंड पहलेYeh mamla sabke saath ho sakta hai, jaagrukata zaroori.
Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेDharm aur aastha hi insaan ko sahi raah dikhati hai.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Nidhi kumari
0 सेकंड पहलेYeh innovation aam logon ke bahut kaam aayega.
Anil Sen
0 सेकंड पहलेHar Hindustani ko yeh padhna aur samajhna chahiye.
Krishna Yadav
0 सेकंड पहलेSach saamne aana chahiye, chahe kitna waqt lage.
भुवनेश्वर: देश में डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही ऑनलाइन ठगी और साइबर हमलों का खतरा भी बढ़ा है। इसी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार ने बैंकिंग सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भुवनेश्वर में RBI के नए डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन किया।
भुवनेश्वर में बना नया डेटा सेंटर
ओडिशा के जटनी स्थित इन्फो वैली-II में यह नया परिसर बनाया गया है। करीब 18.55 एकड़ में फैले इस परिसर में चार अलग-अलग डेटा सेंटर हैं। इसे Tier IV प्रमाणन मिला है, जो बेहतर सुरक्षा और बिना रुकावट काम करने की क्षमता को दर्शाता है। यहां RTGS और NEFT जैसी महत्वपूर्ण बैंकिंग सेवाओं से जुड़ा डेटा और सिस्टम संचालित किए जाएंगे। इससे डिजिटल भुगतान सेवाओं को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलेगी।
साइबर सुरक्षा की मिलेगी ट्रेनिंग
इस परिसर में साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट भी बनाया गया है। यहां RBI के कर्मचारियों के साथ दूसरे बैंकों और वित्तीय संस्थानों के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।इस प्रशिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिग डेटा, क्वांटम कंप्यूटिंग और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य साइबर हमलों को पहचानने और उनसे निपटने के लिए विशेषज्ञ तैयार करना है।
AI से बढ़ रही साइबर ठगी की चुनौती
आज साइबर अपराधी AI की मदद से फर्जी मैसेज, नकली वीडियो और ऑनलाइन ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम के लिए इन खतरों को समय रहते पहचानना जरूरी हो गया है।
AI की मदद से बैंक संदिग्ध लेनदेन और धोखाधड़ी के पैटर्न को जल्दी पहचान सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आधुनिक तकनीक के साथ प्रशिक्षित कर्मचारियों की भी जरूरत है।
क्वांटम-सेफ बैंकिंग पर जोर
भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग से मौजूदा डेटा सुरक्षा तकनीकों के सामने नई चुनौतियां आ सकती हैं। इसे देखते हुए भारत क्वांटम-सेफ बैंकिंग तकनीक विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
C-DAC और बैंक ऑफ इंडिया के बीच हुए समझौते के तहत स्वदेशी सुरक्षा तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा। इससे बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा बढ़ाने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाने की तैयारी
RBI और सरकार का यह कदम देश की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। नए डेटा सेंटर, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा चोरी जैसे खतरों से निपटने में मदद मिलेगी।
AI से बढ़ रही साइबर ठगी की चुनौती
आज साइबर अपराधी AI की मदद से फर्जी मैसेज, नकली वीडियो और ऑनलाइन ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम के लिए इन खतरों को समय रहते पहचानना जरूरी हो गया है। AI की मदद से बैंक संदिग्ध लेनदेन और धोखाधड़ी के पैटर्न को जल्दी पहचान सकते हैं। हालांकि, इसके लिए आधुनिक तकनीक के साथ प्रशिक्षित कर्मचारियों की भी जरूरत है।
क्वांटम-सेफ बैंकिंग पर जोर
भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग से मौजूदा डेटा सुरक्षा तकनीकों के सामने नई चुनौतियां आ सकती हैं। इसे देखते हुए भारत क्वांटम-सेफ बैंकिंग तकनीक विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
C-DAC और बैंक ऑफ इंडिया के बीच हुए समझौते के तहत स्वदेशी सुरक्षा तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा। इससे बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा बढ़ाने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाने की तैयारी
RBI और सरकार का यह कदम देश की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। नए डेटा सेंटर, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा चोरी जैसे खतरों से निपटने में मदद मिलेगी।








