डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: बुजुर्गों से ठगी पर कोर्ट नाराज,साइबर ठगों को राहत नहीं

Sneha Menon
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Riya Jain
0 सेकंड पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Sonu rai
0 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Ritika Ghosh
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Pihu Agarwal
0 सेकंड पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Dev Kapoor
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Anil Sen
0 सेकंड पहलेYeh incident sun ke dil bhaari ho gaya.
Anjali Patil
0 सेकंड पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Trapti Tanwar
0 सेकंड पहलेKanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Anil Sen
0 सेकंड पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Aryan Malhotra
0 सेकंड पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
Ayaan Khan
0 सेकंड पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Nisha Shah
0 सेकंड पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Ishaan Tiwari
0 सेकंड पहलेPoori detail share karein, hum aur jaanna chahte hain.
Priya Iyer
1 मिनट पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Harsh Pandya
10 मिनट पहलेPeedit ko jald se jald nyay milna chahiye.
Pranav Srivastava
14 मिनट पहलेApradhi ko sakht se sakht saza milni chahiye!
Myra Dubey
18 मिनट पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Ritika Ghosh
24 मिनट पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Nidhi kumari
24 मिनट पहलेGawahon ki suraksha bhi utni hi zaroori hai.
Neel Saxena
26 मिनट पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Neha Tripathi
29 मिनट पहलेSociety ke liye yeh bahut badi chinta ka vishay hai.
Shruti Bajpai
1 घंटे पहलेCBI ya SIT jaanch honi chahiye is mamle mein.
Nisha Shah
1 घंटे पहलेAise logon ko chhoda bilkul nahi jaana chahiye.
Taushif Shekh
1 घंटे पहलेPolice ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ऐसे आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं दी जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यह अपराध समाज के सबसे गंभीर साइबर अपराधों में शामिल है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल विशेष परिस्थितियों में ही आरोपी को जमानत देने पर विचार किया जा सकता है। साथ ही हाई कोर्ट और ट्रायल कोर्ट को भी ऐसे मामलों में सतर्क रहने का संदेश दिया गया।
बुजुर्गों की जीवनभर की कमाई बन रही ठगों का निशाना
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम में सबसे अधिक नुकसान बुजुर्ग नागरिकों को उठाना पड़ता है। साइबर अपराधी डर और मानसिक दबाव का फायदा उठाकर उनकी जीवनभर की बचत ठग लेते हैं। अदालत ने कहा कि जिन लोगों को अपनी जमा पूंजी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वही इस तरह की ठगी के सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं। इसलिए ऐसे अपराधों के प्रति न्यायपालिका को बेहद गंभीर दृष्टिकोण अपनाना होगा।
बैंक खाता उपलब्ध कराने वाला भी अपराध में साझेदार
सुनवाई के दौरान एक आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसने केवल मुख्य आरोपी के लिए बैंक खाता खुलवाने में मदद की थी और वह एक वर्ष से अधिक समय से जेल में है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने अपराध को अंजाम देने में किसी भी प्रकार की सहायता की है, तो उसे भी अपराध में सहभागी माना जाएगा। अदालत ने संकेत दिया कि केवल सीमित भूमिका का दावा करने से आरोपी को स्वतः राहत नहीं मिल सकती।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक संगठित साइबर ठगी है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स, कस्टम या आयकर विभाग का अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। वे वीडियो कॉल के माध्यम से फर्जी जांच, गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। कई मामलों में पुलिस स्टेशन जैसी नकली पृष्ठभूमि और वर्दी का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित किया जाता है, जिससे पीड़ित उनके झांसे में आ जाता है।
वीडियो कॉल पर बनाते हैं मानसिक दबाव
साइबर ठग व्हाट्सएप, स्काइप या अन्य वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पीड़ित को लगातार कैमरे के सामने रहने के लिए मजबूर करते हैं। उन्हें किसी से बात न करने और फोन बंद न करने की चेतावनी दी जाती है। इसके बाद झूठे केस, गिरफ्तारी या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप लगाकर डराया जाता है और कथित जांच के नाम पर बैंक खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती है।
सतर्क रहें, किसी भी दबाव में पैसा न भेजें
विशेषज्ञों के अनुसार कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को "डिजिटल अरेस्ट" नहीं करती और न ही जांच के नाम पर बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश देती है। यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर इस तरह की मांग करे, तो उसकी पहचान की पुष्टि करें, तुरंत कॉल समाप्त करें और स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। जागरूकता और सतर्कता ही इस प्रकार के साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।








