Trump Signs Russia-Iran Sanctions Law: रूस-ईरान पर अमेरिकी शिकंजा और कसा, ट्रंप ने प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर

रूस-ईरान पर अमेरिकी शिकंजा और कसा, ट्रंप ने प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर
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Vaishali shinde

Vaishali shinde

0 सेकंड पहले

International politics bahut tezi se badal rahi hai.

Priya Iyer

Priya Iyer

0 सेकंड पहले

Yeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.

Arjun Singh

Arjun Singh

0 सेकंड पहले

World leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.

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रूस-ईरान प्रतिबंध कानून बना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया। व्हाइट हाउस के अनुसार, H.R. 5334 कानून रूस पर वैधानिक प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य प्रतिबंधात्मक प्रावधानों को मजबूत करता है, जबकि ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाता है।

 

रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ का अधिकार
नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले बड़े खरीदार देशों से आने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, इसके दायरे में भारत और चीन जैसे रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदार भी आ सकते हैं। हालांकि, कानून बनने के साथ ही भारत पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ स्वतः लागू नहीं हुआ है; इसके लिए अमेरिकी प्रशासन को आगे निर्णय लेना होगा।

रूस के ऊर्जा और वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई
कानून रूस के ऊर्जा क्षेत्र, सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले माने जाने वाले अन्य नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत करता है। रूस की ऊर्जा बिक्री से जुड़े नेटवर्क पर आर्थिक दबाव बढ़ाना भी इसके प्रमुख प्रावधानों में शामिल है।

 

विधेयक को दोनों दलों से समर्थन
कानून बनने से पहले विधेयक को अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से मंजूरी मिली। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 सितंबर को इस पर हस्ताक्षर किए। व्हाइट हाउस के मुताबिक, कानून का उद्देश्य रूस से संबंधित वैधानिक प्रतिबंधों और टैरिफ संबंधी अधिकारों का विस्तार करना है।

 

भारत पर क्या पड़ सकता है असर
भारत रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार है, इसलिए नए अमेरिकी कानून में दी गई टैरिफ लगाने की शक्ति भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यदि अमेरिकी प्रशासन इस अधिकार का इस्तेमाल करता है, तो भारत से अमेरिका जाने वाले कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क का असर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस अधिकार का इस्तेमाल कब, किस देश के खिलाफ और कितनी दर पर करते हैं।

 

यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर आर्थिक दबाव
अमेरिकी प्रशासन ने कानून को रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में आगे बढ़ाया है। प्रशासन के नीति दस्तावेज के अनुसार, इसका उद्देश्य रूस से जुड़े अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों पर दबाव बढ़ाना तथा रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान की दिशा में आर्थिक प्रभाव का इस्तेमाल करना है।

 

ईरान पर मौजूदा प्रतिबंध भी जारी
इस कानून में रूस के साथ-साथ ईरान से संबंधित प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाने का प्रावधान है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, ईरान से जुड़े मौजूदा प्रतिबंधों को जारी रखने से राष्ट्रपति को ईरान की गतिविधियों के संबंध में मौजूदा कानूनी अधिकार प्राप्त रहेंगे।

 

टैरिफ का वास्तविक असर आगे के अमेरिकी फैसलों पर निर्भर
कानून में राष्ट्रपति को व्यापक अधिकार मिलने के बावजूद हर रूसी ऊर्जा खरीदार देश पर 100 प्रतिशत टैरिफ तत्काल लागू नहीं हुआ है। आगे अमेरिकी प्रशासन की ओर से लिए जाने वाले निर्णय यह निर्धारित करेंगे कि किन देशों और किन उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है। इसलिए भारत पर संभावित प्रभाव को फिलहाल संभावित नीति-प्रभाव के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि तत्काल लागू 100 प्रतिशत टैरिफ के रूप में।

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Vaishali shinde

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International politics bahut tezi se badal rahi hai.

Priya Iyer

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Yeh global crisis sab ko affect kar sakti hai.

Arjun Singh

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World leaders kya kadam uthayenge? Sabki nazar hai.

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