भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा डील: 114 राफेल और 6 P-8I एयरक्राफ्ट को DAC की मंजूरी

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देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान और भारतीय नौसेना के लिए 6 P-8I पोसीडॉन समुद्री निगरानी विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इस रक्षा सौदे की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद योजनाओं में से एक है।
वायुसेना को मिलेंगे 6–7 नए स्क्वाड्रन
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास केवल 29-30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रन की है। पुराने विमानों की सेवानिवृत्ति के कारण यह कमी लगातार बढ़ती जा रही थी। 114 नए राफेल विमानों के शामिल होने से वायुसेना को 6 से 7 नए स्क्वाड्रन मिलेंगे, जिससे उसकी लड़ाकू क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
रिटायर हो चुके और होने वाले विमान: MiG-21 पूरी तरह से रिटायर, MiG-29 के शुरुआती वेरिएंट, जगुआर, मिराज 2000, इनकी जगह अब आधुनिक राफेल विमान लेंगे।
राफेल डील की खास बातें
18 राफेल जेट सीधे फ्लाई-अवे कंडीशन में मिलेंगे, 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे, फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन के साथ गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील, ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे |
राफेल मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो: हवा से हवा, हवा से जमीन, समुद्री हमले, तीनों प्रकार के ऑपरेशन में सक्षम है।
ऑपरेशन सिंदूर में दिखा चुका है दम
राफेल पहले से भारतीय वायुसेना में सेवा दे रहा है। 2016 में भारत ने 36 राफेल विमान खरीदे थे, जो अब पूरी तरह ऑपरेशनल हैं।
पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में राफेल ने: SCALP मिसाइल से सटीक हमले, मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल का उपयोग, आधुनिक स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, के जरिए अपनी ताकत साबित की थी।
नौसेना की ताकत भी बढ़ेगी
DAC ने भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I पोसीडॉन विमान खरीदने को भी मंजूरी दी है। भारत के पास पहले से 12 P-8I हैं। नए विमानों के शामिल होने से: हिंद महासागर में निगरानी मजबूत होगी, पनडुब्बी रोधी क्षमता बढ़ेगी, चीन की समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी, P-8I विमान दुश्मन की पनडुब्बियों और जहाजों को लंबी दूरी से ट्रैक करने में सक्षम हैं।
फ्रांस-भारत संबंध होंगे और मजबूत
यह फैसला फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की भारत यात्रा से पहले लिया गया है। इससे दोनों देशों के रणनीतिक संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है। हालांकि, इस प्रस्ताव को अब अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा।
क्यों अहम है यह डील?
वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या की भरपाई,
सीमाओं पर त्वरित जवाबी क्षमता,
समुद्री सुरक्षा में मजबूती,
‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा,
अत्याधुनिक तकनीक का हस्तांतरण,
इस ऐतिहासिक सौदे से भारत की थल, जल और नभ—तीनों क्षेत्रों में सुरक्षा क्षमता कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।









