ST Commission Notice: शिवराज की नाराजगी के बाद ST आयोग सख्त, MP सरकार को नोटिस

Ritika Ghosh
1 दिन पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Riya Jain
1 दिन पहलेBharat tab hi badlega jab log jagruk aur ekjut honge.
Kunal Rao
1 दिन पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Aryan Malhotra
1 दिन पहलेJai Hind! Desh pahle, baaki sab baad mein.
Sai Mehta
1 दिन पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Aryan Malhotra
1 दिन पहलेIs decision ka poore desh par seedha asar padega.
Rohan Desai
1 दिन पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Kabir Shukla
1 दिन पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने का मामला आयोग तक पहुंचा
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई वन विभाग की ओर से अतिक्रमण हटाने के दौरान की गई थी। मामले के सामने आने के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कार्रवाई पर नाराजगी जताई।
मुख्य सचिव, DGP और कलेक्टर को नोटिस
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), वन विभाग के प्रमुख सचिव, सीहोर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है। उन्हें कार्रवाई की परिस्थितियों, अपनाई गई प्रक्रिया और प्रभावित परिवारों से जुड़े तथ्यों की जानकारी देनी होगी।
शिवराज सिंह चौहान ने कार्रवाई पर जताई नाराजगी
मकान तोड़े जाने के बाद शिवराज सिंह चौहान प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिलने कोसमी गांव पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई का विरोध करते हुए अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और धरना दिया। शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, उनके संसदीय क्षेत्र में परिवारों के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने मकान गिराए गए, फसलें कुचली गईं और कुओं को मिट्टी से भर दिया गया। इन आरोपों और कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एक साल पहले मकान नहीं गिराने के निर्देश देने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, करीब एक साल पहले शिवराज सिंह चौहान ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से बातचीत कर आदिवासी परिवारों के घर नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद हाल ही में वन विभाग ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक निर्देशों और कार्रवाई के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वन विभाग ने जमीन पर अपना दावा बताया
वन विभाग का कहना है कि संबंधित जमीन उसकी है और वहां पेड़ लगाए गए थे। विभाग के अनुसार, पेड़ काटकर उस जमीन पर मकान बनाए गए थे। विभाग ने दावा किया कि अतिक्रमण हटाने से पहले नोटिस दिए गए थे। ऐसे में जमीन के स्वामित्व, नोटिस की प्रक्रिया और प्रभावित परिवारों से जुड़े दावों की जांच महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच के निर्देश दिए
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और उन्होंने जांच कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव से रिपोर्ट भी मांगी है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के नोटिस के बाद संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में जवाब देना होगा। जांच और अधिकारियों के जवाब से यह स्पष्ट हो सकेगा कि मकान तोड़ने की कार्रवाई के दौरान निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।








