EPFO Wage Ceiling Raised to ₹25,000: 3. प्राइवेट कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव, ₹25,000 तक वेतन वालों को मिलेगा EPFO कवरेज

Nisha Shah
3 घंटे पहलेCrypto mein invest karne se pehle aisi khabarein padhni chahiye.
Ananya Sharma
4 घंटे पहलेCrypto mein invest karne se pehle aisi khabarein padhni chahiye.
Aarohi Chaudhary
10 घंटे पहलेEconomy par iska kya asar padega, sochne wali baat hai.
Dhruv Bhatt
11 घंटे पहलेFinancial planning sochni hogi ab naye sir se.
Pihu Agarwal
12 घंटे पहलेChhote vyapariyon ko bahut nuksan hoga isse.
Riya Jain
13 घंटे पहलेChhote vyapariyon ko bahut nuksan hoga isse.
EPFO की अनिवार्य कवरेज सीमा बढ़ी
केंद्रीय कैबिनेट ने प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए EPF और Employee Pension Scheme (EPS) से जुड़े अहम बदलाव को मंजूरी दी है। अनिवार्य EPFO कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई है। यह बदलाव 17 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा।
₹25,000 तक वेतन वालों को मिलेगा दायरे में आने का मौका
नई व्यवस्था के तहत जिन कर्मचारियों की संबंधित वेतन सीमा ₹25,000 प्रति माह तक है, वे अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आएंगे। इससे पहले यह सीमा ₹15,000 प्रति माह थी। सरकार के अनुसार, इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आने की उम्मीद है।
12 साल बाद बदली गई वेतन सीमा
सरकार के मुताबिक EPFO की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा सितंबर 2014 में ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 की गई थी। इसके बाद करीब 12 साल तक इसमें बदलाव नहीं हुआ। अब इसे बढ़ाकर ₹25,000 किया गया है।
51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को फायदा
सरकार के अनुमान के मुताबिक नई व्यवस्था से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को EPFO की अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होने का लाभ मिलेगा। सरकार ने इसे सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने वाला कदम बताया है।
सरकार पर कितना बढ़ेगा खर्च?
वेतन सीमा बढ़ाने से सरकार पर सालाना करीब ₹11,339 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आने का अनुमान है। मौजूदा वार्षिक बजटीय सहायता करीब ₹10,250 करोड़ है, जबकि पांच साल की अवधि में अनुमानित कुल खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ रहने की बात कही गई है।
कर्मचारियों की सैलरी पर क्या असर पड़ेगा?
सैलरी सीमा बढ़ने का मुख्य उद्देश्य ज्यादा कर्मचारियों को EPFO के अनिवार्य कवरेज में लाना है। पेंशन से जुड़े योगदान की व्यवस्था नियोक्ता के योगदान के भीतर से की जाती है। इसलिए केवल वेतन सीमा बढ़ने को कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी से अलग अतिरिक्त कटौती के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
EPS के जरिए पेंशन कवरेज
EPFO व्यवस्था में नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा EPS यानी Employee Pension Scheme में जाता है। नई वेतन सीमा के कारण ज्यादा पात्र कर्मचारियों को EPFO के साथ पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों के दायरे में आने का अवसर मिलेगा। सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है।
फैसला 17 सितंबर से लागू
केंद्रीय कैबिनेट के फैसले के अनुसार बढ़ी हुई EPFO वेतन सीमा 17 सितंबर 2026 यानी विश्वकर्मा जयंती और सेवा दिवस से प्रभावी होगी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और EPFO इसके क्रियान्वयन के लिए जरूरी कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएंगे।
फैसले का मुख्य उद्देश्य
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य ज्यादा प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के औपचारिक दायरे में लाना है। सरकार के अनुसार इससे औपचारिक रोजगार और दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।








