सुप्रीम कोर्ट ने खत्म किया कोलगेट विवाद: सुप्रीम कोर्ट से मनमोहन सिंह को क्लीन चिट

Sonu rai
0 सेकंड पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Myra Dubey
0 सेकंड पहलेChunav ke baad sab bhool jaate hain, yahi haqeeqat hai.
Saanvi Pandey
0 सेकंड पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Pranav Srivastava
0 सेकंड पहलेYeh rajneeti ka asli chehra hai.
Ananya Sharma
0 सेकंड पहलेYeh khabar bahut important hai, sabko pata honi chahiye!
Kunal Rao
0 सेकंड पहलेNeta ji ko yeh khabar zaroor dikhni chahiye!
Arjun Singh
0 सेकंड पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Diya Gupta
0 सेकंड पहलेIs khabar ko sahi tarike se cover kiya gaya hai.
Vivaan Gupta
0 सेकंड पहलेNishpaksh patrakarita ke liye shukriya, aise media chahiye.
Tanya Bajaj
0 सेकंड पहलेSarkar ko public ko jawab dena chahiye.
सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन (कोलगेट) मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चल रहे लंबे आपराधिक मामले को पूरी तरह समाप्त कर दिया। शीर्ष अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए उन्हें मरणोपरांत क्लीन चिट दे दी। इस फैसले के साथ लगभग एक दशक से अधिक समय से चल रहा कानूनी विवाद समाप्त हो गया। अदालत ने कहा कि मामले में उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का पर्याप्त आधार नहीं था।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मिली मंजूरी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सीबीआई द्वारा 2014 में दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। अदालत ने माना कि विशेष सीबीआई अदालत के पास इन रिपोर्टों को खारिज करने और डॉ. मनमोहन सिंह को समन जारी करने का ठोस कानूनी आधार नहीं था। इस टिप्पणी के साथ निचली अदालत की कार्रवाई को अनुचित माना गया। फैसले ने जांच एजेंसी के निष्कर्षों को भी वैधता प्रदान की।
तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था मामला
यह विवाद 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन से संबंधित था। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का प्रभार भी संभाल रहे थे। आरोप था कि कोयला ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई थीं। हालांकि सीबीआई की जांच में उनके खिलाफ आपराधिक नीयत या भ्रष्टाचार के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। इसी आधार पर एजेंसी ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
2015 में जारी हुआ था समन
दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने 2015 में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला को समन जारी किया था। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शीर्ष अदालत ने उसी वर्ष निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। अब अंतिम फैसले में समन जारी करने के आदेश को भी अनुचित ठहराया गया है।
मरणोपरांत सम्मान की रक्षा पर अदालत का जोर
डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को हो चुका था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले को केवल तकनीकी आधार पर समाप्त नहीं किया। अदालत ने कहा कि निचली अदालत के आदेश में पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थीं, इसलिए उनके सम्मान और सार्वजनिक छवि की रक्षा के लिए मामले का गुण-दोष के आधार पर निपटारा आवश्यक था। इस कारण अदालत ने विस्तृत निर्णय सुनाया और उन्हें पूर्ण राहत प्रदान की।
फैसले का राजनीतिक और कानूनी महत्व
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय को पूर्व प्रधानमंत्री की सार्वजनिक छवि और कानूनी प्रतिष्ठा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन में उनके खिलाफ आपराधिक कृत्य या मिलीभगत का पर्याप्त आधार नहीं था। लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का समापन भारतीय न्यायिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। इससे कोलगेट मामले से जुड़े एक प्रमुख अध्याय का अंत हो गया है।



