भोपाल में इंसानियत की मिसाल: ब्रेन-स्टेम डेड आयुर्वेदिक डॉक्टर के अंगदान से तीन मरीजों को मिला नया जीवन
Aditya Verma
0 सेकंड पहलेAisi success stories sabko inspire karti hain.
Aarav Sharma
11 मिनट पहलेIs insaan ki journey bahut inspiring hai, salute!
Kavya Mishra
2 घंटे पहलेYeh story sabko share karni chahiye, bahut motivating hai.
Ravi sinha
3 घंटे पहलेIs insaan ki journey bahut inspiring hai, salute!
Pooja Reddy
3 घंटे पहलेMushkilon se haar nahi maani, yehi asli jeet hai.
भोपाल के बंसल हॉस्पिटल से सामने आई एक घटना ने इंसानियत, संवेदनशीलता और सामाजिक समरसता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। केरल निवासी 42 वर्षीय आयुर्वेदिक डॉक्टर डॉ. सजना एस. ए. गंभीर ब्रेन हैमरेज के बाद अस्पताल में भर्ती थीं। लंबे उपचार के बावजूद डॉक्टरों ने उन्हें ‘ब्रेन-स्टेम डेड’ घोषित कर दिया। इस दुखद घड़ी में उनके परिवार ने साहस और मानवता का परिचय देते हुए अंगदान का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
अंगदान से तीन मरीजों को मिला नया जीवन
परिजनों की सहमति के बाद National Organ and Tissue Transplant Organization (NOTTO) के निर्धारित नियमों के तहत अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। अस्पताल की ट्रांसप्लांट टीम ने सफलतापूर्वक लिवर और किडनी का प्रत्यारोपण किया। इस निर्णय से तीन गंभीर मरीजों को नया जीवन मिला। अस्पताल प्रशासन के अनुसार पूरी प्रक्रिया अधिकृत प्राधिकरण की निगरानी में सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई।
15 मई को हुई थीं भर्ती
जानकारी के अनुसार डॉ. सजना एस. ए. को 15 मई 2026 को गंभीर ब्रेन हैमरेज के बाद भोपाल के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी स्थिति लगातार गंभीर बनी रही और अंततः उन्हें ब्रेन-स्टेम डेड घोषित किया गया। ऐसे कठिन समय में परिवार द्वारा लिया गया अंगदान का निर्णय समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गया।
भावुक माहौल में दी गई अंतिम विदाई
डॉ. सजना के अंतिम सफर को सम्मान देने के लिए अस्पताल परिसर में विशेष व्यवस्था की गई। अस्पताल के गलियारों में फूलों की चादर बिछाई गई और डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य कर्मचारियों ने कतारबद्ध होकर नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर गया।
राजकीय सम्मान के साथ मिला ‘गार्ड ऑफ ऑनर’
मध्य प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार भोपाल पुलिस के जवानों ने दिवंगत डॉ. सजना एस. ए. को पूरे राजकीय सम्मान के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान किया। सलामी के बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए रवाना किया गया। इस अवसर पर अस्पताल प्रशासन ने अंगदान जैसा महान निर्णय लेने के लिए परिजनों का सम्मान भी किया।
बंसल हॉस्पिटल में पहली बार मुस्लिम परिवार ने किया अंगदान
बंसल हॉस्पिटल के इतिहास में यह पहला अवसर था जब किसी मुस्लिम परिवार ने अंगदान कर मानवता और सामाजिक सौहार्द की मिसाल पेश की। परिवार के इस साहसिक कदम ने यह संदेश दिया कि जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य दूसरों के जीवन में उम्मीद और नई शुरुआत देना है। यह घटना समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को प्रेरित करने का कार्य करेगी।
अंगदान का संदेश
डॉ. सजना एस. ए. भले ही इस दुनिया को अलविदा कह गईं, लेकिन उनके अंगदान ने कई परिवारों में खुशियां लौटाने का काम किया। उनका यह अंतिम योगदान हमेशा मानवता और सेवा की भावना का प्रतीक बनकर याद किया जाएगा।






