राम मंदिर मुद्दे पर संसद में घमासान: पप्पू यादव के नाटक पर भाजपा का पलटवार

Aarohi Chaudhary
0 सेकंड पहलेDesh ke liye yeh ek mahatvapurna khabar hai.
Priya Iyer
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Monika Das
0 सेकंड पहलेBharat Mata ki Jai! Yeh khabar garv dilati hai.
Vihaan Patel
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
Dhruv Bhatt
0 सेकंड पहलेIndia ki progress dekh ke dil khush ho gaya!
संसद के मानसून सत्र के दौरान संसद परिसर में राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा अनियमितता के आरोपों को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के नेतृत्व में एक सांकेतिक नुक्कड़ प्रस्तुति दी गई, जिसमें दान पेटी और पुजारी की वेशभूषा का इस्तेमाल किया गया। इस प्रदर्शन के बाद संसद परिसर का माहौल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से गरमा गया।
विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता के सवाल
विपक्षी सांसदों का कहना है कि उनका उद्देश्य राम मंदिर में चढ़ावे के कथित प्रबंधन और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। प्रदर्शन में कुछ सांसद श्रद्धालु की भूमिका में दिखाई दिए, जबकि सांकेतिक रूप से दान पेटी और धन संग्रह को लेकर सवाल उठाए गए। विपक्ष ने इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की भी मांग की।
भाजपा ने बताया आस्था का अपमान
भारतीय जनता पार्टी ने इस प्रदर्शन पर कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि संसद परिसर में इस तरह की प्रस्तुति से भगवान राम, सनातन परंपरा और संत समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है। पार्टी ने कहा कि राजनीतिक विरोध के नाम पर धार्मिक प्रतीकों का उपयोग उचित नहीं है और इसे संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
लोकसभा अध्यक्ष ने जताई नाराजगी
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद परिसर में इस प्रकार के प्रदर्शन और वेशभूषा पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतांत्रिक बहस का मंच है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सदस्यों से संसदीय आचरण और नियमों का पालन करने की अपेक्षा जताई।
शिकायत और कानूनी कार्रवाई की मांग
प्रदर्शन के बाद कुछ संगठनों और भाजपा नेताओं ने संबंधित सांसदों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, मामले में किसी भी कानूनी कार्रवाई का अंतिम निर्णय संबंधित जांच और सक्षम प्राधिकरण की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
मानसून सत्र में बढ़ा राजनीतिक टकराव
राम मंदिर से जुड़े इस विरोध प्रदर्शन के बाद संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है। एक ओर विपक्ष इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा इसे धार्मिक आस्था और संसदीय गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय बता रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।







