इमिग्रेशन फ्रॉड के 154 मामले, कार्रवाई शून्य: विदेश भेजने के नाम पर ठगी,

विदेश भेजने के नाम पर ठगी,
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Aarohi Chaudhary

Aarohi Chaudhary

0 सेकंड पहले

Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Ananya Sharma

Ananya Sharma

0 सेकंड पहले

Kanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.

Priya Iyer

Priya Iyer

0 सेकंड पहले

Kanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.

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केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों ने पंजाब में इमिग्रेशन धोखाधड़ी की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। वर्ष 2023 से 2025 के बीच अवैध ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ कुल 154 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन किसी भी मामले में अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) जारी नहीं हुई। परिणामस्वरूप एक भी आरोपी अदालत में सजा तक नहीं पहुंच सका। संसद में सामने आए इस खुलासे ने कानून व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विदेश भेजने के नाम पर ठगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है।


2025 में शिकायतों में आया बड़ा उछाल
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में 56, वर्ष 2024 में 18 और वर्ष 2025 में 80 शिकायतें दर्ज की गईं। यानी 2024 की तुलना में 2025 में मामलों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में नौकरी और पढ़ाई के बढ़ते आकर्षण का फायदा फर्जी एजेंट उठा रहे हैं। युवाओं से लाखों रुपये लेकर उन्हें फर्जी वीजा, नकली ऑफर लेटर और गलत दस्तावेजों के जरिए ठगा जा रहा है। इससे पंजाब के हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक संकट का सामना कर रहे हैं।


पंजाब पूरे क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रभावित
लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में कुल 291 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें अकेले पंजाब की हिस्सेदारी 154 मामलों यानी लगभग 53 प्रतिशत रही। सबसे अधिक शिकायतें दोआबा क्षेत्र के जालंधर, होशियारपुर और कपूरथला जिलों से सामने आई हैं। वहीं मोहाली, अमृतसर और लुधियाना भी धीरे-धीरे फर्जी इमिग्रेशन एजेंटों के नए केंद्र बनते जा रहे हैं। लगातार बढ़ते मामलों ने प्रशासन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

जीरो प्रॉसिक्यूशन से उठे बड़े सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि तीन वर्षों में किसी भी मामले में अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली। यानी जांच के बाद भी अदालत में मुकदमा आगे नहीं बढ़ सका। पूरे उत्तर भारत के इस क्षेत्र में केवल हरियाणा से वर्ष 2024 में एक अभियोजन स्वीकृति का अनुरोध आया, जिसे मंजूरी मिली। पंजाब में एक भी मामला इस स्तर तक नहीं पहुंच पाया। इससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है और फर्जी एजेंटों के हौसले बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।


सरकार ने eMigrate पोर्टल अपनाने की दी सलाह
विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि विदेश में नौकरी या रोजगार के लिए केवल पंजीकृत रिक्रूटिंग एजेंटों की सेवाएं लें। सरकार ने इसके लिए eMigrate पोर्टल उपलब्ध कराया है, जहां अधिकृत एजेंटों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि बिना सत्यापन किसी एजेंट को पैसे न दें और सभी दस्तावेजों की जांच अवश्य करें। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई ही कबूतरबाजी जैसे संगठित अपराध पर प्रभावी रोक लगा सकती है।


युवाओं की विदेश जाने की चाह बन रही ठगों का हथियार
पंजाब में बड़ी संख्या में युवा विदेश में पढ़ाई और रोजगार के अवसर तलाशते हैं। इसी सपने का फायदा उठाकर फर्जी ट्रैवल एजेंट लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं। कई मामलों में पीड़ितों को न तो वीजा मिलता है और न ही उनकी रकम वापस होती है। संसद में सामने आए आंकड़ों ने स्पष्ट किया है कि केवल शिकायत दर्ज कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रभावी जांच, अभियोजन और न्यायिक कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है। विशेषज्ञों ने सरकार से कानूनी प्रक्रिया तेज करने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की मांग की है।

 

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Police ko aur tezi se karyawahi karni chahiye.

Ananya Sharma

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Kanoon ko apna kaam karna chahiye bina der ke.

Priya Iyer

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