12 साल का संघर्ष, 40 बार असफलता: फिर MPPSC में रचा इतिहास

Anjali Patil
3 घंटे पहलेSapne dekhne waale hi unhe poora karte hain.
Pranav Srivastava
4 घंटे पहलेMushkilon se haar nahi maani, yehi asli jeet hai.
Payal jadon
6 घंटे पहलेHaar ke baad jeetna hi asli champion ki pehchaan hai.
Arjun Singh
8 घंटे पहलेZindagi mein aise log hi role model hote hain.
Sonu rai
10 घंटे पहलेAisi success stories sabko inspire karti hain.
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के सिवनी-मालवा तहसील के खपरिया गांव निवासी मनोज पाल की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल बन गई है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार असफलताओं के बाद अपने सपने छोड़ देते हैं। मनोज ने करीब 12 वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और इस दौरान लगभग 40 परीक्षाओं में असफलता या निराशा का सामना किया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और MPPSC राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन सहायक संचालक, वित्त विभाग के पद पर हुआ।
12वीं में सिर्फ 50 प्रतिशत अंक, लेकिन सपने बड़े थे
मनोज पाल की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई। उन्होंने 12वीं की परीक्षा करीब 50 प्रतिशत अंकों के साथ पास की। साधारण किसान परिवार से आने वाले मनोज के सामने आर्थिक संसाधनों की कमी थी, लेकिन उन्होंने सरकारी नौकरी हासिल कर अपने और परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने का लक्ष्य तय किया। आगे की पढ़ाई के लिए वह नर्मदापुरम पहुंचे और पढ़ाई के साथ अपनी जरूरतों का खर्च निकालने के लिए अलग-अलग काम भी किए।
पढ़ाई के साथ बच्चों को पढ़ाकर जुटाया खर्च
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान मनोज ने आर्थिक परेशानियों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ कंटेंट राइटिंग, कॉपी चेकिंग और कोचिंग से जुड़े काम किए। इन कामों से मिलने वाली आय का इस्तेमाल उन्होंने अपनी पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्च के लिए किया।
कोरोना काल में करनी पड़ी मजदूरी
मनोज के संघर्ष का सबसे कठिन दौर कोरोना महामारी के दौरान आया। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उन्हें गांव लौटकर मजदूरी तक करनी पड़ी। गेहूं की बोरियां उठाने जैसे काम करके उन्होंने पैसे जुटाए और अपनी तैयारी को जारी रखा। बाद में वह इंदौर पहुंचे, जहां बच्चों को पढ़ाने और कोचिंग में काम करने के साथ MPPSC की तैयारी करते रहे।
लगभग 40 परीक्षाओं में मिली असफलता
सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश में मनोज ने करीब 40 प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लिया। उन्होंने पटवारी, पुलिस आरक्षक, वनरक्षक, लेखापरीक्षक सहित कई भर्ती परीक्षाओं के अलावा SSC और MPPSC की विभिन्न परीक्षाएं भी दीं। कई बार वह परीक्षा के अगले चरण तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना पाए।
MPPSC में कई बार इंटरव्यू तक पहुंचे
मनोज की कहानी में MPPSC के प्रयास सबसे खास रहे। उपलब्ध विवरण के अनुसार उन्होंने MPPSC में कई प्रयास किए, जिनमें कई बार प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा पास की तथा इंटरव्यू तक पहुंचे। इसके बावजूद अंतिम चयन नहीं हो पाया। लगातार असफलताओं के बाद भी उन्होंने तैयारी छोड़ने के बजाय अपनी रणनीति और कमजोरियों पर काम करना जारी रखा।
परिवार और समाज के तानों का भी करना पड़ा सामना
लंबे समय तक नौकरी नहीं मिलने के कारण मनोज को परिवार और समाज के दबाव का सामना भी करना पड़ा। उम्र बढ़ने और परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्हें पढ़ाई छोड़कर कोई काम करने की सलाह दी गई। लगातार असफलताओं के कारण आसपास के लोगों के ताने भी सुनने पड़े। हालांकि, इन परिस्थितियों ने मनोज को अपने लक्ष्य से पीछे हटने नहीं दिया।
रोज 6 से 8 घंटे पढ़ाई और अनुशासन बना हथियार
मनोज ने अपनी तैयारी के दौरान अनुशासन को सबसे ज्यादा महत्व दिया। वह सुबह करीब 6 बजे लाइब्रेरी पहुंच जाते थे और दिनभर निर्धारित समय के अनुसार पढ़ाई करते थे। वह रोजाना लगभग 6 से 8 घंटे अध्ययन करते थे। इसके साथ ही मॉक टेस्ट, पुराने प्रश्नपत्रों का अभ्यास और अपनी गलतियों का आत्मविश्लेषण उनकी तैयारी का अहम हिस्सा रहा।
MPPSC 2024 में 15वीं रैंक से पूरा हुआ सपना
लगातार प्रयासों और वर्षों की मेहनत के बाद MPPSC 2024 में मनोज पाल को वह सफलता मिली जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था। उन्होंने पूरे प्रदेश में 15वीं रैंक हासिल की और सहायक संचालक, वित्त विभाग के पद पर चयनित हुए। यह उपलब्धि उनके 12 वर्षों के संघर्ष और लगातार असफलताओं के बाद मिली बड़ी जीत है।
असफलता को बनाया सफलता की सीढ़ी
मनोज पाल की कहानी यह बताती है कि किसी परीक्षा में असफल होना मंजिल का अंत नहीं होता। लगभग 40 परीक्षाओं में असफलता के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी नहीं छोड़ी। हर असफलता से सीख लेते हुए उन्होंने अपनी रणनीति में सुधार किया और अंततः अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया।
युवाओं के लिए मनोज का संदेश
मनोज पाल का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदलना चाहता है तो उसे पूरी ताकत और ईमानदारी से मेहनत करनी चाहिए। अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचानकर लगातार सुधार करना जरूरी है। उनके संघर्ष से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं को यह सीख मिलती है कि लंबा इंतजार और असफलताओं के बावजूद खुद पर विश्वास बनाए रखना ही सफलता की राह खोल सकता है।
एक लाइन में मनोज पाल की कहानी
50% अंकों से 12वीं पास करने वाले मनोज पाल ने मजदूरी से लेकर करीब 40 असफल परीक्षाओं तक का सफर तय किया और आखिरकार MPPSC 2024 में 15वीं रैंक हासिल कर अधिकारी बनने का सपना पूरा कर दिखाया।








