मानसून सत्र में फिर आ सकता है परिसीमन विधेयक: महिला आरक्षण और परिसीमन पर सरकार की तैयारी

Vaishali shinde
0 सेकंड पहलेIs maamle mein sarkari paksh kya hai?
Shruti Bajpai
0 सेकंड पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Tanya Bajaj
1 घंटे पहलेPehli baar itni sach khabar padhi, shukriya!
Shruti Bajpai
3 घंटे पहलेYeh rajneeti ka asli chehra hai.
20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक प्रस्तावित संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक 2026 (Delimitation Bill 2026) को संशोधनों के साथ दोबारा पेश कर सकती है। हालांकि, सरकार ने अभी तक विधेयक को पेश करने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं और सभी दलों की नजरें आगामी सत्र पर टिकी हुई हैं।
क्या हैं प्रस्तावित प्रमुख प्रावधान?
प्रस्तावित विधेयक को लेकर सार्वजनिक चर्चाओं और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लोकसभा की अधिकतम सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने, निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन तथा नई परिसीमन प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों पर विचार किया जा रहा है। साथ ही अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। अंतिम स्वरूप संसद में पेश किए जाने वाले विधेयक पर निर्भर करेगा।
महिला आरक्षण से जुड़ा अहम मुद्दा
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विधेयक महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्चा है कि प्रस्तावित संशोधनों के जरिए महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय संसद की मंजूरी और विधेयक के अंतिम प्रावधानों पर आधारित होगा।
सरकार और विपक्ष के अलग-अलग तर्क
केंद्र सरकार का कहना है कि देश की बढ़ती आबादी के कारण एक सांसद पर मतदाताओं का भार काफी बढ़ गया है, इसलिए सीटों के पुनर्गठन की आवश्यकता है। वहीं विपक्ष और दक्षिण भारत के कई राजनीतिक दलों का तर्क है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व के संतुलन पर असर पड़ सकता है। सरकार का दावा है कि किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं होगा और सभी राज्यों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
सहयोगियों से सहमति बनाने की कोशिश
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सरकार विधेयक को लेकर अपने सहयोगी दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ व्यापक चर्चा कर रही है ताकि संसद में अधिक से अधिक सहमति बनाई जा सके। हालांकि, इस संबंध में संबंधित दलों की ओर से आधिकारिक स्थिति संसद में चर्चा के दौरान ही स्पष्ट होगी।
संसद में बहस के बाद होगी तस्वीर साफ
परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर अभी कई बिंदुओं पर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं। यदि सरकार मानसून सत्र में इसे पेश करती है, तो संसद में विस्तृत बहस के बाद ही इसके अंतिम स्वरूप, संशोधनों और पारित होने की स्थिति स्पष्ट होगी। ऐसे में आने वाला मानसून सत्र देश की चुनावी और संसदीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।








